रायपुर।छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित खल्लारी माता मंदिर में हुए रोपवे हादसे ने टीचर आयुषी धावरे की जान ले ली। पति ऐसे घायल हुए कि पत्नी को अंतिम विदाई देने तक के लिए उठ नहीं सके।
रीति रिवाज के मुताबिक आखिरी वक्त में सिंदूर देना था, पर हाथ नहीं पहुंचे, बस केवल कांपते रहे। इस विदाई को जिसने भी देखा, उसकी आंखों में आंसू आ गए। आयुषी धावरे का अंतिम संस्कार रायपुर के मणिकर्णिका मुक्तिधाम में किया गया।
बता दें कि खल्लारी में रोपवे की 2 ट्रॉली हादसे की शिकार हुई थी। पहले ट्रॉली के श्रद्धालु दर्शन कर वापस लौट रहे थे। तभी केबल टूटने से ट्रॉली अनियंत्रित हो गई, और लगभग 20 फीट नीचे पहाड़ी की चट्टान से जा टकराई। इस जोरदार झटके के कारण ट्रॉली में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिसमे आयुषी ने दम तोड़ दिया।
साथ ही मृतका आयुषी के पति (ऋषभ धावरे) की कमर की हड्डी टूट गई। दूसरी ट्रॉली भी हादसे का शिकार हो गई, जिसमें लोगों को आंशिक चोटें आई। हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीण और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
घायलों को निजी वाहनों की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में लगभग 16 श्रद्धालु घायल हुए हैं, और एक की मौत हुई है। घटना के बाद जिला प्रशासन ने हादसे की जांच की, लापरवाही सामने आने पर मां खल्लारी देवी ट्रस्ट को FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।





