सुप्रीम कोर्ट में TET मामले की सुनवाई : शिक्षकों के लिए 1 सितंबर 2027 तक का समय, जानें कोर्टरूम में क्या हुआ

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट में  इन-सर्विस शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर अहम सुनवाई हुई। यह मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है जो पहले से नौकरी कर रहे हैं लेकिन TET पास नहीं हैं। सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच (कोर्ट नंबर 8) में हुई।

1. कोर्ट का सख्त रुखः “शिक्षा की गुणवत्ता सवोंपरि

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय का रुख काफी सख्त नजर आया। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के अनुसार, भले ही शिक्षकों के पास B.Ed या BTC जैसी योग्यताएं हों, लेकिन शिक्षक पद पर बने रहने के लिए TET पास करना अनिवार्य है।

2 .पुराने शिक्षकों (Pre-2010) की स्थिति

वकीलों की दलीलः वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और सलमान खुर्शीद ने तर्क दिया कि पुराने शिक्षकों को इस दायरे से बाहर रखना चाहिए।

कोर्ट का जवाब: कोर्ट ने RTE एक्ट के 2017 के संशोधन (Amendment) का हवाला दिया और पूछा कि क्या इस कानून में कहीं स्पष्ट रूप से लिखा है कि पुराने शिक्षकों को छूट मिलेगी? कोर्ट ने कहा कि वह कानून से बंधा है और यदि कोई बदलाव होना है तो वह संसद के माध्यम से ही संभव है।

3 .राहत की ‘डेडलाइन’ और भविष्य पर खतरा

न्यायालय ने शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए एक समय सीमा का संकेत दिया है।

कोर्ट के अनुसारः

शिक्षकों को 1 सितंबर 2027 तक का समय दिया जा सकता है जिसके भीतर उन्हें TET उत्तीर्ण करना होगा।

यदि इस निर्धारित समय तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं कर पाते, तो उनकी नौकरी पर खतरा मंडरा सकता है।

4 .राज्यों और शिक्षक संघों का पक्ष

तमिलनाडु जैसे राज्यों और टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शिक्षकों की व्यवहारिक कठिनाइयों को सामने रखा। मध्य प्रदेश के संदर्भ में यह दलील दी गई कि आदिवासी क्षेत्रों (जैसे बैगा जनजाति वाले इलाके) में संसाधनों की कमी है, इसलिए नियमों में छूट मिलनी चाहिए।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य मुद्दा केवल TET की अनिवार्यता पर केंद्रित है।

शिक्षकों के लिए जरूरी सलाह


शिक्षक केवल कोर्ट के भरोसे न बैठें। चूंकि सीटेट (CTET) 2026 और विभिन्न राज्यों के TET (जैसे UPTET) के अवसर उपलब्ध हैं, इसलिए अपनी तैयारी जारी रखें और परीक्षा उत्तीर्ण करें ताकि कानूनी रूप से भविष्य सुरक्षित रहे


“शिक्षा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। शिक्षक पद पर बने रहने के लिए TET पास करना अनिवार्य है।”

– जस्टिस दीपांकर दत्ता ,सुप्रीम कोर्ट

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