राजनांदगांव : मोहर्रम में ‘शेर’ बनकर नाचने की परंपरा पर उठे सवाल, मुस्लिम समाज ने पुलिस से की सख्त कार्रवाई की मांग

राजनांदगांव : मोहर्रम के दौरान ‘शेर’ बनकर नाचने की परंपरा को लेकर राजनांदगांव में विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम समाज ने इस परंपरा की आड़ में होने वाली कथित हुड़दंग और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है।

मंगलवार को बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और एडिशनल एसपी को ज्ञापन सौंपकर मोहर्रम के दौरान शेर बनकर नाचने, हथियारों के प्रदर्शन, तेज ध्वनि वाले बाजा-धुमाल तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

मुस्लिम समाज का कहना है कि कुछ लोग शेर बनने की आड़ में धार्मिक आयोजनों को मनोरंजन का माध्यम बना रहे हैं। आरोप है कि ऐसे आयोजनों के दौरान कई बार सार्वजनिक अशांति, यातायात अवरोध और महिलाओं से अभद्रता जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं।

जामा मस्जिद के अध्यक्ष हाजी रईस अहमद शकील ने कहा कि हाल ही में भिलाई और बिलासपुर में उर्स के दौरान हुई कथित अव्यवस्थाओं पर वक्फ बोर्ड ने संज्ञान लिया था। उन्होंने बताया कि धार्मिक आयोजनों में फूहड़ गीत, नशे की हालत में शामिल होने और नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रदेशभर में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि मोहर्रम के दौरान भी शेर बनने के नाम पर कई लोग हथियार लेकर सड़कों पर निकलते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और यातायात प्रभावित होता है।

हाजी रईस अहमद शकील ने यह भी कहा कि शेर बनने की परंपरा का इस्लामिक शरीयत से कोई संबंध नहीं है और इसे धार्मिक परंपरा के बजाय मनोरंजन का रूप दे दिया गया है, जो उचित नहीं है।

मुस्लिम समाज ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि शेर बनकर अर्धनग्न अवस्था में धार्मिक स्थलों और दरगाहों में प्रवेश करने वालों पर रोक लगाई जाए। समाज का आरोप है कि कुछ लोग नशे की हालत में भी धार्मिक स्थलों में प्रवेश करते हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं।

वहीं, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा भी पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।

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