खैरागढ़ । वनांचल शिक्षा सेवा न्यास, रायपुर द्वारा संचालित सरस्वती शिक्षा केंद्रों के नवीन एवं वरिष्ठ आचार्यों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खैरागढ़ में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण में खैरागढ़, छुईखदान और डोंगरगढ़ संकुल के 55 आचार्यों ने भाग लेकर संस्कारयुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि मोतीलाल यादव ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण और वनांचल क्षेत्रों में संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
मुख्य वक्ता मनोहर लाल चंदेल ने शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और इको ब्रिक्स के उपयोग जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षण के दौरान आदर्श आचार्य की संकल्पना, बालकों के सर्वांगीण विकास, प्रार्थना, खेल, शिशु गीत, कहानी, व्यक्तित्व विकास और शिक्षण पद्धति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समापन सत्र में भागवत शरण सिंह, शशांक ताम्रकार और श्रीराम यादव ने संस्कारयुक्त शिक्षा, आधुनिक तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सकारात्मक उपयोग तथा पंचकोष आधारित व्यक्तित्व विकास पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पूर्व एवं वर्तमान आचार्यों का सम्मान भी किया गया। अंत में रोशन जंघेल ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण वर्ग का समापन किया।
आयोजकों ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शिक्षण कौशल विकसित करना नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में संस्कारवान, चरित्रवान और जागरूक पीढ़ी के निर्माण के लिए शिक्षकों को तैयार करना है।






