- धरसींवा में अफसरों की सुस्ती से ‘अमृत सरोवर’ योजना फेल: रसूखदारों ने नियमों को ताक पर रख बेची सरकारी मुरम
धरसींवा ( विद्या भूषण वर्मा ) । केंद्र सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी ‘अमृत सरोवर योजना’ सरकारी अफसरों की लापरवाही और रसूखदारों की मनमानी के कारण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इस योजना के तहत क्षेत्र की 22 ग्राम पंचायतों को तालाब निर्माण और जल संरक्षण के लिए चुना गया था। मकसद साफ था कि गांवों का जलस्तर सुधरे और स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिले। लेकिन धरातल पर आते-आते यह योजना कुछ लोगों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन गई। हालांकि कुछ पंचायतों में इस योजना के तहत बहुत अच्छे कार्य भी हुए हैं, लेकिन कई जगह अफसरों की सुस्ती का फायदा उठाकर भारी गड़बड़ी की गई। कुछ पंचायतों में आधा-अधूरा काम करके सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर दी गई, तो कुछ रसूखदारों ने इसे अवसर बनाकर मुरम की काली कमाई का जरिया बना लिया।
इस पूरे खेल में खनिज विभाग की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में लापरवाही से मुक्त नहीं किया जा सकता। खनिज विभाग ने तालाब से केवल कुछ ही सीमित एरिया की मुरम खुदाई की अनुमति दी थी, लेकिन रसूखदारों ने नियमों को ताक पर रखकर तय सीमा से कई गुना ज्यादा खुदाई कर डाली। हैरानी की बात यह है कि अनुमति देने के बाद खनिज विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जांच करने या झांकने तक नहीं आया। अधिकारियों की इसी रहस्यमयी चुप्पी और उदासीनता के कारण ठेकेदारों और रसूखदारों के हौसले बुलंद रहे और उन्होंने बेखौफ होकर सरकारी खजाने को चूना लगाया।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने आनन-फानन में मौके पर चल रही खुदाई और मशीनों के काम पर रोक तो लगा दी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब तक अफसर नींद से जागे और कार्रवाई की, तब तक भ्रष्टाचारी अपना पूरा खेल खेल चुके थे और लाखों रुपये की कीमती मुरम बाजार में खपा दी गई थी। अगर समय रहते जिम्मेदार अधिकारी सही तरीके से अपनी ड्यूटी करते और मौका मुआयना करते, तो इतना बड़ा भ्रष्टाचार कभी नहीं होता।
- क्या कहता है कानून? मजदूरों का हक छीना तो होगी जिम्मेदार लोगों से रिकवरी
मिशन अमृत सरोवर और मनरेगा गाइडलाइंस के तहत ग्रामीण विकास कार्यों में जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानूनन, तालाब खुदाई का काम सिर्फ स्थानीय मजदूरों से ही कराया जा सकता है ताकि उन्हें गांव में रोजगार मिले। यदि कोई अधिकारी या ठेकेदार इस नियम का उल्लंघन करता है, तो इसे धोखाधड़ी और सरकारी धन का दुरुपयोग माना जाएगा। ऐसे दोषियों के खिलाफ अवैध खर्च की रिकवरी होगी और संबंधित अधिकारियों के ऊपर भी विभागीय जांच बैठेगी।
इस पर जनपद पंचायत धरसींवा के मुख्यकार्यपालन अधिकारी श्री आशीष केसरवानी ने कहा कि धरसींवा जनपद की 22 ग्राम पंचायतों में स्वीकृत अमृत सरोवर कार्य अधिकांशतः पूर्ण हो चुके हैं। कुछ पंचायतों में जेसीबी से मुरम निकालने की शिकायत प्राप्त होते ही काम तत्काल बंद करा दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए गए हैं; अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।






