छत्तीसगढ़ में शिक्षकों का हल्लाबोल, 15 जुलाई को विधानसभा घेराव की तैयारी, चरमरा सकती है शिक्षण व्यवस्था

  • 15 जुलाई 2026: राज्य स्तरीय महा-प्रदर्शन और विधानसभा का घेराव किया जाएगा

रायपुर।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही शिक्षा विभाग में बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वेतन विसंगति और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, आगामी 15 जुलाई को प्रदेशभर के सहायक शिक्षक सामूहिक अवकाश लेकर राजधानी रायपुर में विधानसभा का घेराव करेंगे।फेडरेशन के प्रांतीय और जिला पदाधिकारियों की बैठकों में इस आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस हड़ताल के कारण प्रदेश के हजारों प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

क्या हैं सहायक शिक्षकों की प्रमुख मांगें?शिक्षक संघ लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से संवाद कर रहा था, लेकिन कोई ठोस समाधान न निकलने के कारण उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • वेतन विसंगति दूर करना: सहायक शिक्षकों के वेतन में व्याप्त विसंगतियों को दूर कर क्रमोन्नति वेतनमान लागू किया जाए।
  • वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति: सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप पदोन्नति में वरिष्ठता का पूर्ण पालन हो।
  • सेवा सुरक्षा: विभागीय परीक्षा के माध्यम से सभी सहायक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • प्रथम नियुक्ति से पेंशन: शिक्षकों की पेंशन गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से की जाए ताकि उन्हें पूर्ण पेंशन लाभ मिल सके।
  • शिक्षकों की कमी दूर हो: एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
  • TET अनिवार्यता की समाप्ति: पुराने शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

अब तक क्या हुआ और आगे का शेड्यूल

फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राठौर और जिला अध्यक्षों के नेतृत्व में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है:

  • 6 जुलाई 2026: शिक्षा सचिव से मुलाकात और रायपुर में प्रेस वार्ता कर मांगों को सामने रखा गया।
  • 7 से 13 जुलाई 2026: प्रदेशभर में स्थानीय सांसदों और विधायकों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर समर्थन मांगा गया।
  • 15 जुलाई 2026: राज्य स्तरीय महा-प्रदर्शन और विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

स्कूलों पर पड़ेगा सीधा असर इस आंदोलन के तहत यदि हजारों शिक्षक एक साथ सामूहिक अवकाश पर जाते हैं, तो विशेष रूप से ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों के एकल शिक्षकीय स्कूल पूरी तरह बंद हो सकते हैं। पालकों और छात्रों में पढ़ाई प्रभावित होने को लेकर चिंता बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि 15 जुलाई के इस बड़े प्रदर्शन से पहले प्रशासन या शिक्षा विभाग शिक्षकों को बातचीत के लिए बुलाता है या यह गतिरोध और लंबा खिंचता है।

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