डौण्डीलोहारा :- पर्यावरण गतिविधि व संरक्षण ठीम, जिला बालोद द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से सीडबॉल, बीजरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर जी, अध्यक्षता श्री जितेन्द्र कुमार उइके प्राचार्य जी ,विशेष अतिथि डोमेन्द्र राजपूत जनपद सदस्य डौण्डी लोहारा ,योगेश्वर प्रसाद साहू, वैभव साहू ,संजय साहू, चित्ररेखा साहू, डौमेन्द्र देशमुख,छबि लाल, विनोद कुमार साहू व कमलकांत साहू पर्यावरण गतिविधि जिला संयोजक ने प्रशिक्षण दिया इस कार्याशाला में सभी समस्त शिक्षको का सहयोग प्राप्त हुआ श्री नरेश कुमार पटोटी,श्रीमती हिरमन चौरले,श्री केवल सिंह नुरेटी,श्री लोचन प्रसाद साहू ,श्रीमती भेनुमति चतुर्वेदी,श्री संदीप कुमार वर्मा,श्रीमती कादम्बिनी यादव, श्रीमती खिलेश्वरी तिवारी, श्री खुमीर सिंह परतेती , श्री तेज राम बघेल, श्रीमती सुषमा छुने ,श्री प्रेमलाल भुआर्य, श्री रोशन कुमार भण्डारी ,श्री मनोज कुमार पाटिल,श्री रितेश्वर यादव ,श्रीमती सरिता साहू ,श्री प्रदीप कुमार साहू ,कार्यालयीन स्टाफ श्री तेज प्रताप राजपूत, श्री ओम प्रकाश सिन्हा, श्री कमलेश कुमार ताण्डे , श्रीमती सविता कुरे, श्री शत्रुधन सिंह,श्रीमती केशरी बाई, श्री आकाश ठाकुर,प्यारे लाल सिन्हा ,आदित्य कुमार उइके , सुश्री दीपिका साहू श्री भुवन लाल गंगबोइर व विद्यालय के भैया बहन भागीदारी दिखाया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 08:00 बजे हुआ इस कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चलचित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ कार्याशाला के मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि पद्मश्री डोमार सिंह कुंवर जी ने गीत के माध्यम से कहां यह एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी विचार है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या व्यक्तिगत प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक जन-आंदोलन बनकर ही सफल हो सकता है।जब सामाजिक कार्यकर्ता, परिवार और समुदाय साथ आते हैं, तो इसके सकारात्मक प्रभाव प्रगट होता है सीडबॉल बनाना एक आसान प्रक्रिया है जिसे बच्चे, बुजुर्ग और परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर कर सकते हैं। यह खाली पड़ी बंजर ज़मीनों या दुर्गम क्षेत्रों में हरियाली लाने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। इसे सामूहिक भागीदारी जब सामाजिक कार्यकर्ता इसे एक अभियान का रूप देते हैं, तो यह तकनीक कम समय में हज़ारों पेड़ लगाने में मदद करती है।वृक्षारोपण केवल लगाना नहीं, बचाना भी अक्सर पेड़ लगा तो दिए जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा नहीं हो पाती। यदि पूरा परिवार या मोहल्ले के लोग मिलकर पेड़ लगाते हैं, तो वे उसकी अभिभावक की भूमिका निभाते हैं, जिससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ जाती है जब परिवार मिलकर एक ‘स्मृति वृक्ष’ या ‘पारिवारिक वाटिका’ तैयार करते हैं, तो उससे भावात्मक जुड़ाव पैदा होता है, जो संरक्षण को सुनिश्चित करता है, सामाजिक कार्यकर्ताओं मार्गदर्शन सामाजिक कार्यकर्ता बीज चयन स्थानीय प्रजातियों का चयन, मिट्टी की तैयारी और सही समय मानसून का चुनाव करने में एक उत्प्रेरक की तरह कार्य कर सकते हैं। जागरूकता का आवश्यकता सामुदायिक स्तर पर लोगों को यह समझा सकते हैं कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक का काम नहीं, बल्कि ‘जीवन की सुरक्षा’ का काम है। जब पेड़ लगाने का कार्य एक सामुदायिक उत्सव बन जाता है, तो पर्यावरण का संरक्षण स्वतः ही सुनिश्चित हो जाता है।”
आपके इस विचार को धरातल पर उतारने के लिए क्या आप किसी विशेष क्षेत्र या समुदाय के साथ कोई अभियान शुरू करने की योजना बना रहे हैं जिसमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने जिससे भविष्य में हरित आवरण बढ़ेगा तथा जैव विविधता का संरक्षण होगा।
अध्यक्षता कर रहे श्री जितेन्द्र कुमार उइके जी कहां यहां कार्य को हम परिवार के साथ बैठकर भी कर सकते है जिस प्रकार पिता जी ने 10 सीडबॉल ,माता जी 10 इस प्रकार से दादी दादा भी कर सकते है यहां सभी का जिम्मेदारी है । वृक्षारोपण इसलिए आवश्यक है क्योंकि पेड़ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, हवा से हानिकारक गैसों और धूल को सोखकर पर्यावरण को शुद्ध करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं मानव जीवन के लिए मूल आधार वृक्षारोपण वन कार्बन-डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं और जल चक्र को बनाए रखकर मौसम और तापमान को नियंत्रित करते हैं हरे-भरे पेड़ों के बीच रहने से तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। कार्यक्रम के अंत में कमल कांत साहू द्वारा ‘नेशनल स्टूडेंट पर्यावरण प्रतियोगिता’ (National Student Paryavaran Competition – 2026 NSPC) के बारे में जानकारी दिया गया यह छात्रों के लिए एक पर्यावरण-आधारित प्रतियोगिता है इसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है यह प्रतियोगिता 15 जुलाई से शुरू हो चूका है जो 15 अगस्त तक चलेगी पंजीकरण (Registration): भाग लेने के लिए आप पोस्टर में दिए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या उनकी आधिकारिक वेबसाइट paryavaransanrakshan.org पर जा सकते हैं कार्यक्रम में पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया।






