22 जनवरी को भारत के चुनाव आयोग ने देश के लगभग 100 करोड़ मतदाताओं के लिए एक नया सेंट्रलाइज्ड डिजिटल सिस्टम ECINet लॉन्च किया था, जिसके तहत आयोग के 40 से अधिक ऐप्स और पोर्टल को एक साथ जोड़ा गया। इसी के साथ चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में सुधार के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू किया।
इस प्रक्रिया के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। आरोप है कि इस केंद्रीकृत (Centralised) प्रणाली के कारण जमीनी अधिकारियों से वोटर लिस्ट में बदलाव करने और नए नाम जोड़ने-हटाने का अधिकार छीन लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया में विसंगतियां पैदा हुईं।
- फॉर्म-6 (Form 6) में बदलाव पर आंतरिक घमासान
विवाद का एक और बड़ा कारण :Form 6 (नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म) में किया गया बदलाव है। नए नियमों के तहत आवेदन करने वाले युवाओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि वे अपने माता-पिता या पूर्वजों के नाम पुरानी वोटर लिस्ट में ढूंढें और उसका विवरण दें।चुनाव आयुक्त सुखवीर सिंह संधू ने आधिकारिक फाइल में इस बदलाव को “अनाधिकृत और अवैध” दर्ज किया था।पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों (जैसे ओ.पी. रावत और एस.वाई. कुरैशी) ने भी माना कि बिना नियमों में संशोधन किए फॉर्म-6 में ऐसा बदलाव करना पूरी तरह से गलत और गैर-कानूनी था।
- ‘ज्ञानेश कुमार बनाम अन्य चुनाव आयुक्त’:
एकतरफा फैसले का आरोपमीडिया इन्वेस्टिगेशन के अनुसार, चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर काम के बंटवारे और आईटी सिस्टम की निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की थीं। आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बाकी दोनों आयुक्तों की सलाह के बिना मनमर्जी से फैसले ले रहे थे, और कई बड़े नीतिगत निर्णयों की जानकारी दोनों चुनाव आयुक्तों को मीडिया के माध्यम से मिल रही थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि कानूनन चुनाव आयोग में सभी फैसले बहुमत या सर्वसम्मति से होने चाहिए, न कि केवल सीईसी की मर्जी से।
- विपक्ष का देशव्यापी प्रदर्शन और महाभियोग की तैयारी
इस खुलासे के बाद देश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है:राहुल गांधी का हमला: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है और सरकार पर ‘वोट चोरी’ की साजिश का आरोप लगाया है।
- सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक:
कांग्रेस, आरजेडी और वामपंथी छात्र संगठनों (AISA) ने दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर सहित कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। वहीं, दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है।
विवाद के बढ़ते ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि:
- किसी भी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और आपत्तियां आना सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।
- आंतरिक टिप्पणियों को अंतिम फैसलों से अलग करके देखा जाना चाहिए।
- पिछले एक साल में SIR समेत सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति (Unanimously) से और कानून के दायरे में रहकर लिए गए हैं।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि संवैधानिक संस्थाओं पर निशाना साधना और अपनी चुनावी हार का ठीकरा उन पर फोड़ना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है।
इस बढ़ते तनाव के बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश (मेरठ और वाराणसी) का प्रस्तावित दौरा भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।








