बलौदाबाजार,जैन समाज के दस दिवसीय पर्यूषण पर्व में शुक्रवार को तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस दिन धर्मावलंबियों ने बाहरी दिखावे के बजाय मन की सरलता, व्यवहार में सहजता और अहंकार से दूरी को जीवन का आधार बनाने का संदेश लिया। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। भगवान जिनेंद्र देव के अभिषेक, शांतिधारा और पूजन के बाद धार्मिक प्रवचन हुए। महिला, पुरुषों के साथ बच्चों ने भी धार्मिक आयोजनों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
उत्तम आर्जव धर्म का मूल भाव मन, वचन और कर्म में सरलता रखना है। प्रवचन में बताया गया कि व्यक्ति के भीतर छिपा मान, अहंकार और अभिमान उसे दूसरों से दूर करता है। इसके विपरीत सरल और सहज व्यवहार व्यक्ति को आत्मिक शांति की ओर ले जाता है। धन, पद, प्रतिष्ठा या ज्ञान का अहंकार क्षणिक रूप से व्यक्ति को बड़ा महसूस करा सकता है, लेकिन आत्मिक उन्नति के मार्ग में यही अहंकार बाधा बनता है। इसलिए जीवन में विनम्रता को स्थान देना और हर व्यक्ति के प्रति सम्मान व समानता का भाव रखना जरूरी है।
श्रद्धालुओं को समझाया गया कि आर्जव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित रहने वाला विषय नहीं है, बल्कि यह दैनिक जीवन के व्यवहार से जुड़ा धर्म है। मन में कुछ और और व्यवहार में कुछ और रखने के बजाय विचार, वाणी और आचरण में एकरूपता रखना ही सच्ची सरलता है। परिवार, समाज और कार्यस्थल पर दूसरों के प्रति सहज व्यवहार तथा अपनी गलतियों को स्वीकार करने की भावना भी आर्जव धर्म का हिस्सा है।
इस दिन की शांतिधारा का सौभाग्य महावीर प्रसाद, संदीप कुमार एवं सुजल काला परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं प्रथम चार कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य दिनेश जैन, महेंद्र जैन, प्रवीण जैन तथा दिनेश-दीपांशु जैन परिवार को मिला। धार्मिक अनुष्ठानों में परिवारों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता की।
पर्यूषण पर्व के दसों दिनों की पूजन सामग्री के पुण्यार्जक शिखरचंद, सुभाष कुमार एवं संजय कुमार काला परिवार, गुवाहाटी-कोलकाता-बलौ दाबाजार रहे। मंदिर में हुए धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
दिनभर मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, धार्मिक चर्चा और भक्ति का माहौल बना रहा। पर्व के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। पर्यूषण पर्व को जैन समाज में आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन और अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का अवसर माना जाता है। पर्व के प्रत्येक दिन अलग-अलग धर्मों के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाने का संदेश दिया जाता है। पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म का पालन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अहंकार और आडंबर से दूर रहकर जीवन में सरलता, विनम्रता और सहजता अपनाने का संकल्प लिया। उत्तम आर्जव धर्म मन, वचन और कर्म में सरलता रखने तथा किसी प्रकार के छल-कपट से दूर रहने की प्रेरणा देता है। श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन करते हुए अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया।








