आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक: बछड़े पर जानलेवा हमला, पेट के पास लगाए 15 टांके

  • डोंगरगांव में अप्रैल से अब तक कुत्ते के काटने पर 1450 डोज लगे, सितंबर में 31 और अक्टूबर में अब तक 8 मामले सामने आए

घनश्याम साव,डोंगरगांव, नगर पालिका क्षेत्र के मटिया वार्ड में शिवनाथ नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम के पास आवारा कुत्तों के झुंड ने एक बछड़े पर जानलेवा हमला कर दिया। कुत्तों ने बछड़े के पेट के पास के हिस्से को बुरी तरह नोच डाला। मौके पर मौजूद लोगों की मदद से बछड़े को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया जा सका गंभीर रूप से घायल बछड़े का पशु चिकित्सक से उपचार कराया गया। इस घटना ने नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों से पशुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर को सुबह करीब 9 बजे घटना की सूचना मिलने पर ग्राम पटेल पुसऊ पटेल और पार्षद पुरुषोत्तम साहू वार्ड के युवाओं के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने तत्काल पशु चिकित्सालय के चिकित्सक को बुलाकर बछड़े का उपचार कराया। हमले में बछड़े के पेट के पास गंभीर घाव हो गया था, जिस पर 15 टांके लगाए गए। प्राथमिक उपचार के बाद भी उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। बछड़ा डरा-सहमा है और खाना-पीना छोड़ चुका है। उसकी देखभाल के लिए उसे नगर की जैन गौशाला में सुपुर्द किया गया है।

सात किलोमीटर दूर गांव में भी पशुओं पर हमले की सूचना…

डोंगरगांव से करीब सात किलोमीटर दूर ग्राम साल्हेघुघवा (लक्ष्मीनगर) में भी आवारा कुत्तों द्वारा तीन-चार पालतू पशुओं को नुकसान पहुंचाने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इस गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर मुर्गी फार्म भी स्थित है। हालांकि, मुर्गी फार्म और कुत्तों के हमलों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। इस पहलू की जांच के साथ क्षेत्र में कुत्तों की गतिविधियों और आबादी का आकलन किया जाना जरूरी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में घूमने के लिए छोड़ देते हैं और दूध निकालने के समय घर लाते हैं। ऐसे में पशुओं पर हमला होने या उनके घायल होने की घटनाएं समय पर सामने नहीं आ पातीं। आवारा कुत्तों के हमलों से पशुओं की सुरक्षा के साथ-साथ खुले में घूमने वाले मवेशियों के प्रबंधन और पशुपालकों की जिम्मेदारी पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

अस्पताल में कुत्ते के काटने के मामले चिंता का विषय…

आवारा कुत्तों का खतरा केवल पशुओं तक सीमित नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव से मिली जानकारी के अनुसार, सितंबर में कुत्ते के काटने के 31 मामले सामने आए, जबकि अक्टूबर में अब तक आठ मामले दर्ज किए गए हैं। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक, अप्रैल से अब तक कुत्ते के काटने वाले मरीजों के उपचार में कुल 1450 डोज लगाए जा चुके हैं। एक व्यक्ति को सामान्यतः पांच डोज लगाए जाने की जानकारी के आधार पर यह संख्या लगभग 290 व्यक्तियों के पूर्ण उपचार के बराबर हो सकती है। हालांकि, वास्तविक मरीजों की संख्या की पुष्टि अस्पताल के रिकॉर्ड से ही होगी। वर्तमान में आपातकालीन जरूरत के लिए 240 डोज उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

लगातार सामने आ रहे मामले कुत्ते के काटने से बचाव, समय पर उपचार और आवारा कुत्तों के प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। हालांकि, केवल टीकों की खपत के आधार पर आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए क्षेत्रवार सर्वेक्षण, घटनाओं का रिकॉर्ड और कुत्तों की आबादी का आकलन जरूरी है।

समय रहते ठोस पहल जरूरी..

स्थानीय स्तर पर आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों को काटने की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण, पशुओं और लोगों की सुरक्षा तथा काटने की घटनाओं में कमी लाने के लिए नगर पालिका, पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय से कार्रवाई की आवश्यकता है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप कुत्तों की आबादी का सर्वेक्षण, लागू नियमों के अनुसार नसबंदी एवं टीकाकरण, संवेदनशील स्थानों की पहचान और जनजागरूकता जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

कुत्तों के प्रजनन के मौसम में पिल्लों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए दीर्घकालीन योजना बनाना भी जरूरी है। गिद्धों की घटती मौजूदगी सहित पर्यावरणीय कारणों पर वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर विचार किया जा सकता है, लेकिन किसी एक कारण को इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा।

मटिया वार्ड में बछड़े पर हुआ हमला एक गंभीर चेतावनी है। आवारा कुत्तों की समस्या का समय रहते आकलन कर प्रभावी और मानवीय उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में पशुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ी परेशानी और गंभीर हो सकती है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग ठोस कार्ययोजना बनाकर उसके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी करें।

Hot Topics

Related Articles