बलौदाबाजार। पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती और सीखने का जज्बा हो तो परिवार के सदस्य भी एक साथ शिक्षा की राह पर आगे बढ़ सकते हैं। रविवार को जिले में आयोजित राष्ट्रव्यापी साक्षरता महापरीक्षा में ऐसा ही प्रेरणादायी नजारा देखने को मिला। कहीं पति-पत्नी, कहीं सास-बहू, तो कहीं देवरानी-जेठानी और सगी बहनें एक साथ परीक्षा देने पहुंचीं। एक परीक्षा केंद्र पर तो एक ही परिवार के पति-पत्नी, सास-ससुर और बेटा-बहू ने महापरीक्षा में शामिल होकर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
जिले के 157 परीक्षा केंद्रों में आयोजित इस महापरीक्षा के लिए कुल 1467 शिक्षार्थियों को चिन्हांकित किया गया था, जिनमें से 1403 शिक्षार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इस तरह शिक्षार्थियों ने उत्साहपूर्वक परीक्षा देकर अपने अर्जित ज्ञान का मूल्यांकन कराया। परीक्षा केंद्रों में उत्साह का माहौल रहा और शिक्षार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रश्नों के उत्तर दिए।
157 केंद्रों में 1403 शिक्षार्थियों ने दी परीक्षा
महापरीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षार्थियों को स्वयंसेवी शिक्षकों द्वारा 200 घंटे तक सात अध्यायों के माध्यम से पढ़ाया गया था। शिक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्हें निर्धारित समय और स्थान पर पढ़ाई कराई गई। इसके बाद रविवार को परीक्षा आयोजित कर उनके सीखने के स्तर का आकलन किया गया।
परीक्षा सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई। शिक्षार्थियों को इस अवधि के दौरान अपनी सुविधानुसार परीक्षा केंद्र पहुंचकर परीक्षा देने की छूट दी गई थी। प्रश्नपत्र में पढ़ना, लिखना और गणित विषय शामिल थे। प्रत्येक विषय के लिए 50-50 अंक निर्धारित किए गए थे। इस प्रकार परीक्षा कुल 150 अंकों की थी।
स्कूल शिक्षा विभाग देगा साक्षरता प्रमाण पत्र
जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सदस्य सचिव शिव कुमार गेंदले ने बताया कि जिले के सभी 157 परीक्षा केंद्रों पर संबंधित ग्राम एवं वार्ड के प्रधानपाठकों को केंद्राध्यक्ष बनाया गया था। वहीं, संबंधित संस्थाओं के शिक्षकों ने पर्यवेक्षण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाली।
महापरीक्षा में शामिल शिक्षार्थियों को अंकपत्र सह साक्षरता प्रमाण पत्र स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की ओर से प्रदान किया जाएगा।
पीला चावल देकर परीक्षा के लिए किया आमंत्रित
महापरीक्षा को लेकर शिक्षार्थियों में उत्साह बढ़ाने के लिए शिक्षक और स्वयंसेवी शिक्षक घर-घर पहुंचे। परीक्षा से एक-दो दिन पहले शिक्षार्थियों को पीला चावल और परीक्षा पर्ची देकर परीक्षा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। इस पहल का असर परीक्षा के दिन केंद्रों पर देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में शिक्षार्थी उत्साह के साथ परीक्षा देने पहुंचे।
परीक्षा केंद्रों पर भी माहौल को उत्सव जैसा बनाया गया था, ताकि शिक्षार्थी बिना किसी संकोच के परीक्षा में शामिल हो सकें। महापरीक्षा का आयोजन कलेक्टर एवं जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के अध्यक्ष कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया।
इस महापरीक्षा में परिवार के सदस्यों का एक साथ शामिल होना इस बात का उदाहरण बना कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। सीखने की इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी उम्र में पढ़ना-लिखना सीखा जा सकता है।








