खासापारा डोंगाम में वन अधिकार पट्टों और राजस्व रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो—30 दिन में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

  • नवनीत चाँद के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जगदलपुर से चर्चा कर सौंपा ज्ञापन

  • ओम मरकाम और रामू नाग ने कहा—वास्तविक कब्जाधारियों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

रमेश कुमार सलाम जगदलपुर, 12 अक्टूबर 2026। ग्राम पंचायत जाटम के आश्रित ग्राम खासापारा डोंगाम में वन अधिकार पट्टों, वास्तविक भूमि कब्जे तथा राजस्व अभिलेखों में कथित विसंगतियों को लेकर बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष नवनीत चाँद ने निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग उठाई। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जगदलपुर से चर्चा कर ज्ञापन सौंपते हुए संबंधित परिवारों को न्याय दिलाने तथा अभिलेखों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।

नवनीत चाँद ने कहा कि शिकायतकर्ताओं के अनुसार, संबंधित परिवार लंबे समय से विवादित भूमि पर कृषि एवं आजीविका के लिए निर्भर हैं। ऐसे में वन अधिकार पट्टों, वास्तविक कब्जे और खसरा नंबर 127, 122, 123, 125 एवं 928 से जुड़े पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों की तुलना आवश्यक है। कथित त्रुटि-सुधार, नामांतरण एवं भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों के आदेशों के आधार पर पूरी की गई, इसकी जांच होनी चाहिए।

प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से सीधे सवाल

– वन अधिकार पट्टे जारी करने और राजस्व रिकॉर्ड में कथित बदलाव की प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही?

– क्या संबंधित आदेश, मूल खसरा, बी-1, नक्शा, नामांतरण पंजी और पंजीयन दस्तावेजों का मिलान किया गया?

– क्या ग्रामसभा, वन अधिकार समिति तथा संबंधित सक्षम समितियों के अभिलेखों और निर्णयों का नियमानुसार पालन हुआ?

– क्या वास्तविक कब्जे का निष्पक्ष स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कराया गया?

– क्या संबंधित अवधि में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, अनियमितता अथवा पद के दुरुपयोग की भूमिका सामने आती है?

– प्रभावित परिवारों को जांच के निष्कर्ष और न्यायोचित निर्णय के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

छह स्पष्ट मांगें

1. 15 दिवस के भीतर प्रारंभिक जांच एवं स्थल निरीक्षण कराया जाए और शिकायतकर्ताओं को प्रगति से अवगत कराया जाए।

2. 30 दिवस के भीतर संपूर्ण जांच रिपोर्ट तैयार कर निष्कर्ष एवं की गई कार्रवाई की स्थिति शिकायतकर्ताओं को लिखित रूप में दी जाए।

3. सभी संबंधित मूल राजस्व, पंजीयन और वन अधिकार अभिलेख तत्काल सुरक्षित रखे जाएं तथा पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड का तुलनात्मक सत्यापन हो।

4. वास्तविक कब्जे, सीमांकन, ग्रामसभा के प्रस्तावों और वन अधिकार संबंधी दावों की विधिसम्मत जांच कराई जाए।

5. जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता, कूटरचना अथवा पद के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

6. जांच लंबित रहने तक विवादित भूमि के संबंध में किसी भी प्रस्तावित नामांतरण या हस्तांतरण पर सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित अंतरिम संरक्षण देने पर विचार करे, ताकि जांच प्रभावित न हो और किसी पक्ष के वैध अधिकारों को नुकसान न पहुंचे।

ओम मरकाम और रामू नाग का संयुक्त बयान

जगदलपुर विधानसभा कार्यकारी अध्यक्ष ओम मरकाम एवं जगदलपुर ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष रामू नाग ने संयुक्त रूप से कहा कि ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों के भूमि एवं वन अधिकारों से जुड़े मामलों में प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक कब्जे में अंतर है, तो उसका कारण स्पष्ट किया जाए। पात्र परिवारों के अधिकारों की रक्षा हो तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

संवैधानिक एवं कानूनी पक्ष

वन अधिकार अधिनियम, 2006 एवं उसके नियमों, लागू राजस्व कानूनों तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अनुरूप निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। जहां लागू हो, पांचवीं अनुसूची और PESA अधिनियम, 1996 के प्रावधानों का भी पालन हो। किसी व्यक्ति को बिना निष्पक्ष जांच दोषी न ठहराया जाए और किसी पात्र परिवार को प्रशासनिक या अभिलेखीय अनियमितता के कारण उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए।

नवनीत चाँद ने कहा: “हमारी मांग स्पष्ट है—खासापारा डोंगाम प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, पुराने और वर्तमान रिकॉर्ड का मिलान हो, वास्तविक कब्जे की सच्चाई सामने आए और 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पर जवाबदेही तय हो। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई हो और यदि किसी पात्र परिवार के अधिकार प्रभावित हुए हैं तो उसे कानून के अनुसार न्याय मिले। बस्तर के ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

 

 

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