- ग्राम समिति प्रमुख सहित अन्य ग्रामीणों पर अघोषित बहिष्कार का आरोप
घनश्याम साव,डोंगरगाँव ।डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम अरसीटोला में एक परिवार के साथ अघोषित बहिष्कार का मामला सामने आया है. इस परिवार ने लंबे इंतजार के बाद न्याय नहीं मिलने के चलते डोंगरगांव प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकार वार्ता में अपनी पीड़ा बतायी और न्याय की मांग की. ग्राम अरसीटोला के सरिता कुंजाम व उसके पति कौशल राम कुंजाम ने अपनी आप बीती प्रेस के सामने रखा. जिसमें उन्होंने बताया कि विगत कुछ वर्षों से ग्राम के कुछ प्रमुख लोगों के व्दारा हमारे परिवार का अघोषित रूप से बहिष्कार कर दिया गया है. गांव में परिवार के साथ बातचीत से लेकर उठने बैठने और कोई भी लेनदेन पर पूर्ण रूप से मनाही कर दी गई है. जिसके चलते हमारे जीवन यापन में भी अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है और आर्थिक और मानसिक रूप से काफी परेशानियाँ खड़ी हो रही है.
उन्होंने विस्तार से बताया कि हमारे ग्राम अरसीटोला में घर के सामने बचपन से ही एक छोटे से दुकान का संचालन किया जाता रहा था, उसे ईष्यावश हटा दिया गया. इसके बाद हमारे परिवार को लगातार प्रताडि़त किया जाता रहा है. पीडि़त कौशल कुमार कुंजाम ने बताया कि वह ग्राम पंचायत में रोजगार सहायक है और पहले उन्होंने अपने ही कोकपुर ग्राम पंचायत में अपनी सेवाएँ दी और इस विवाद के चलते उन्हें ग्राम पंचायत आसरा भेज दिया गया. वहीं उनकी धर्मपत्नि सरिता कुंजाम जो वर्तमान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत हैं, उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि गांव के रूपचंद मंडावी, कृपाराम लाउत्रे, टीकमचंद पटेल, उदेराम गोंड़ सहित अन्य ग्रामीणों व्दारा अपने आपको प्रमुख बताकर लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है और उनके व्दारा झूठे आरोप लगाकर मुझे निलंबित करवा दिया गया. वहीं न्यायिक लड़ाई लडक़र कलेक्टर राजनांदगांव और आयुक्त के माध्यम से पुन: बहाली मिलने के बाद गांव के आंगनबाड़ी में जाना प्रारंभ किया था लेकिन महज दो दिनों पश्चात ही फिर से कुछ ग्रामीणों व्दारा गांव के अन्य लोगों को भडक़ाकर और घर घर जाकर दबाव बनाया गया कि सरिता जिस आंगनबाड़ी में है वहाँ अपने बच्चों को न भेजें अन्यथा गांव स्तर पर दंडित किया जायेगा. इस बात से डरे ग्रामीणों ने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजना बंद कर दिया. वहीं सरिता ने बताया कि इस बात की जानकारी अपने विभागीय अधिकारियों को दी थी जिसके बाद मुझे और गांव की एक और अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को डोंगरगांव महिला बाल विकास विभाग में अटैच कर रखा गया है. प्रतिदिन अरसीटोला से डोंगरगांव आना जाना मानसिक और आर्थिक रूप से काफी कष्टदायक है. इतना ही नहीं गांव के प्रमुखों के व्दारा हमारे काम्प्लेक्स में किरायेदारों को भी दबाव बनाया गया और बातचीत तथा लेनदेन नहीं करने कहा गया है और यह नहीं मानने पर बड़ी राशि का अर्थ दंड दिया जायेगा. इधर ग्रामीणों व्दारा शासन-प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए गाडिय़ों में भरकर जिला मुख्यालय तक कई बार आवेदन दिया गया और अब समझौता के नाम पर आने जाने के लिए लगी इन गाडिय़ों खर्च एवं नास्ता पानी का खर्च जोडक़र 60 हजार रूपये की पुन: मांग की जा रही है. कौशल कुंजाम ने आगे बताया कि पूर्व में भी अर्थदंड के रूप में 25 हजार रूपये ग्राम समिति व्दारा लिया जा चुका है और लगताार उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है. वर्तमान में मेरे परिवार के साथ ग्रामीणों का बातचीत लेनदेन पूर्ण रूप से बंद करा दिया गया है जो कि हमारे लिए काफी कष्टदायक है. वहीं मानसिक प्रताडऩा के चलते जेब में सुसाईड नोट लेकर चलता हंू अब यह पीड़ा असहनीय हो गई और आगे मेरे व मेरे परिवार व बच्चों के लिए भी खतरा बना हुआ है. शासन-प्रशासन से हमारी मांग है कि हमें पूर्ववत मुख्य धारा से जोड़ा जाये और गांव स्तर पर भी पूरा मान-सम्मान मिले.






