डोंगरगांव (दीपक अवस्थी)| गुरु घासीदास बाबा की जयंती जैसे पावन अवसर पर नगर पंचायत डोंगरगांव की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई। छत्तीसगढ़ शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नगर में मांस, मछली और अंडा विक्रय पर रोक का आदेश ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। यह स्थिति न सिर्फ शासनादेश की अवहेलना है, बल्कि अहिंसा के प्रतीक गुरु घासीदास बाबा की आस्था और भावनाओं का खुला अपमान भी मानी जा रही है।
नगर पंचायत डोंगरगांव द्वारा आदेश क्रमांक 2311/योजना/पशुवध/2025-26 के तहत दिनांक 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर नगर सीमा अंतर्गत समस्त पशुवध गृह तथा मांस, मछली एवं अंडा विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रखने के निर्देश जारी किए गए थे। यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन, नवा रायपुर अटल नगर के पत्र दिनांक 18 अगस्त 2022 के संदर्भ में जारी किया गया था।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई।
मौके पर की गई पड़ताल में सामने आया कि डोंगरगांव के मुख्य बाजार सहित कई इलाकों में मुर्गा और मटन की खुलेआम बिक्री होती रही। कई स्थानों पर बिना किसी डर या रोक-टोक के पशुवध और मांस विक्रय जारी था। न तो नगर पंचायत की निगरानी दिखाई दी और न ही पुलिस-प्रशासन की कोई सख्ती।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब आदेश की प्रतिलिपि अन्य संबंधित विभागों और यहां तक कि जीव दया आश्रम को भी भेजी गई थी, तो फिर आदेश का पालन क्यों नहीं कराया गया? क्या यह आदेश सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गया?
स्थानीय नागरिकों और समाज के लोगों का कहना है कि गुरु घासीदास बाबा अहिंसा, मानवता और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उनकी जयंती पर पशुवध और मांस विक्रय होना समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है। लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता और दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है—
क्या आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
या फिर हर साल की तरह यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
गौरतलब है कि दिनभर नगर पंचायत के जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार लोग सोशल मीडिया पर गुरु घासीदास बाबा की जयंती को लेकर फोटो और संदेश साझा करते रहे, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रहे उल्लंघन और बाबा की जयंती पर हो रहे अपमान को देखने कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया।
सतनामी समाज में गहरी नाराजगी
“हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। नगर पंचायत को सख्ती के साथ एक दिन के लिए मांस, मछली और अंडा विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कराना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे समाज आहत है।”
कमल लहरे,
जिला महामंत्री, सतनामी समाज





