घाघी पर्यटन स्थल बदहाल: 5 किलोमीटर सड़क का इंतजार, सुविधाओं के अभाव में पर्यटन पर संकट

जियाउल खान ,सरगुजा


  • ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर लगाया अनदेखी का आरोप, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने स्तर पर कर रहीं सड़क की मरम्मत और साफ-सफाई

सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मैनपाट के बाद अपनी अलग पहचान रखने वाला घाघी पर्यटन स्थल आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थलों को विकसित करने के दावों के बीच यहां तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाल स्थिति, गंदगी और बैठने व शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए सड़क निर्माण और पर्यटन स्थल के विकास की मांग उठाई है।

विकासखंड दरिमा के नवापाराकला क्षेत्र के करमहा गांव के जंगलों के बीच स्थित घाघी पर्यटन स्थल प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां चट्टानों के बीच से दूध जैसी सफेद जलधारा बहती है, जिसे आसपास के कई गांवों के लिए उपयोगी माना जाता है। स्थानीय लोग इस पानी का उपयोग सिंचाई और खेती के लिए भी करते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं के बावजूद यह स्थल आज भी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहा है।

  •  पांच किलोमीटर सड़क, लेकिन सुविधाओं का इंतजार

स्थानीय लोगों के मुताबिक, मुख्य मार्ग से घाघी पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। सड़क की खराब हालत के कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी कठिन हो जाती है। आपात स्थिति में बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाने की नौबत आने का दावा भी ग्रामीणों ने किया है।

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 15 से 20 परिवार निवास करते हैं। सड़क की समस्या केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों के दैनिक आवागमन और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ी हुई है।

  • वादों के बावजूद सड़क निर्माण पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के दौरान सड़क निर्माण को लेकर आश्वासन दिए गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क बनने के बाद उद्घाटन के लिए सबसे पहले पहुंचने की बात भी कही गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पंचायत के माध्यम से कई बार आवेदन दिए और वर्तमान विधायक के समक्ष भी अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो पाया है। लोगों ने सड़क निर्माण के लिए टेंडर होने की बात भी कही है। हालांकि, टेंडर की स्थिति, स्वीकृत राशि और निर्माण कार्य में देरी के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  •  महिलाएं खुद संभाल रहीं सड़क और स्वच्छता की जिम्मेदारी

पर्यटन स्थल पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों से प्रवेश शुल्क लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि सड़क की बदहाली के कारण उन्हें अपने स्तर पर मरम्मत और साफ-सफाई करनी पड़ती है। महिलाओं के मुताबिक, पंचायत प्रतिनिधि भी इस काम में समूह का सहयोग करते हैं।

उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के कार्यकाल में यहां मिट्टी-मुरुम डालने का काम कराया गया था। इसके बाद से समूह को ही सड़क की देखरेख और मरम्मत के लिए प्रयास करना पड़ रहा है।

महिलाओं का कहना है कि यदि सड़क बेहतर हो जाए और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकता है।

  • पर्यटन विकास के दावों के बीच सुविधाओं का अभाव

स्थानीय लोगों के मुताबिक, घाघी में न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। जगह-जगह गंदगी और खराब सड़क के कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि कई पर्यटक घाघी जाने के बजाय सीधे मैनपाट चले जाते हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के बाद से मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनकी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। उनका सवाल है कि जब क्षेत्र में पर्यटन विकास की संभावनाएं मौजूद हैं, तो सड़क और स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में देरी क्यों हो रही है?

  •  जिम्मेदारों से जवाब की दरकार

घाघी पर्यटन स्थल की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े करती है। क्या सड़क निर्माण के लिए वास्तव में टेंडर जारी हुआ है? यदि हां, तो निर्माण कार्य अब तक क्यों शुरू नहीं हुआ? पर्यटन स्थल के विकास के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई और उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया? प्रवेश शुल्क से प्राप्त राशि का प्रबंधन कैसे होता है? इन सवालों पर संबंधित विभाग, पंचायत और जनप्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

फिलहाल घाघी पर्यटन स्थल की तस्वीर बदलने के लिए स्थानीय लोग सड़क निर्माण, नियमित साफ-सफाई, शौचालय और पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन मांगों पर कब तक कार्रवाई करते हैं और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस स्थल को पर्यटन के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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