नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले आम जनता की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ पड़ा है। खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ते हुए ₹55 से ₹65 प्रति किलो के पार पहुंच चुकी हैं। महज एक महीने पहले (20 जुलाई को) जो चीनी औसतन ₹48.18 प्रति किलो बिक रही थी, वह 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई है। इस अचानक आई तेजी से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई और कन्फेक्शनरी कारोबारी भी चिंतित हैं।
- चीनी महंगी होने के 5 मुख्य कारण
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी के दामों में अचानक आई इस तेजी के पीछे निम्नलिखित मुख्य वजहें बताई हैं:
- अनुमान से कम घरेलू उत्पादन: चालू सीजन में चीनी का कुल घरेलू उत्पादन उम्मीद से काफी कम रहा है। चीनी उत्पादक राज्यों के शुरुआती अनुमान (343 लाख टन) के मुकाबले वास्तविक उत्पादन केवल 306 लाख टन के आसपास रहने की संभावना है।
- मौसम की मार और फसल बीमारियां: देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और जलभराव (Waterlogging) के कारण गन्ने की फसल खराब हुई है। इसके अलावा गन्ने में लगने वाले ‘रेड रॉट’ (Red Rot) और ‘टॉप बोरर’ (Top Borer) जैसे रोगों ने उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाया है।
- त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग: रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के नजदीक आने के कारण बाजार में शक्कर की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ी है।
- वैश्विक बाजार में चीनी की कमी: चीनी की किल्लत सिर्फ भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखी जा रही है। साल 2026-27 के लिए वैश्विक स्तर पर लगभग 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें पिछले दो महीनों में 16% से अधिक बढ़कर $474 प्रति टन से $552 प्रति टन पर पहुंच गई हैं।
- जमाखोरी और सट्टेबाजी: सरकार के अनुसार, बाजार में कमी की खबरों के बीच कुछ व्यापारियों और उद्योग के हिस्सों द्वारा चीनी की जमाखोरी (Hoarding) और सट्टेबाजी करने से भी कीमतों पर अनावश्यक दबाव बना है।
- एथेनॉल पर सरकार का स्पष्टीकरण
- बाजार में यह चर्चा भी जोरों पर थी कि पेट्रोल में मिलाने के लिए गन्ने से एथेनॉल (E20) बनाने के कारण चीनी महंगी हो रही है। हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकार के मुताबिक, एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 के 12% से घटकर अब केवल 9% रह गई है और देश के एथेनॉल उत्पादन का तीन-चौथाई हिस्सा अब मक्के और अनाज से तैयार हो रहा है।














