बिलासपुर।सिम्स ऑडिटोरियम में ‘नवा प्रांतीय सम्मेलन’ संपन्न: 13 पुस्तकों का विमोचन, साहित्यकार सम्मानित बिलासपुर: छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘नवा प्रांतीय सम्मेलन’ (नवम अधिवेशन) का समापन बिलासपुर के सिम्स ऑडिटोरियम में भव्यता के साथ हुआ। इस गरिमामय आयोजन में प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने और इसके संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
दैनिक जीवन में हो छत्तीसगढ़ी का प्रयोग: राजेश अग्रवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा हमारे प्रदेश की अस्मिता और पहचान है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह और प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि भाषा के निरंतर विकास के लिए हमें अपने दैनिक जीवन और सामान्य बातचीत में छत्तीसगढ़ी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए।
साहित्य और संस्कृति का समागम सत्र की अध्यक्षता कर रहे अतिथियों और विशिष्ट अतिथि बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक व बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से लेकर अब तक की भाषाई विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बिलासपुर के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा, श्यामलाल चतुर्वेदी और नंदकिशोर शुक्ल के योगदान को याद किया। राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने स्वागत भाषण दिया और सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने रूपरेखा प्रस्तुत की। सम्मान और लोकार्पण सम्मेलन के दौरान साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार सरला शर्मा, बंशीधर लाल, डॉ. विजय सिन्हा, डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, डॉ. डीपी देशमुख और मोहनलाल डहरिया को शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। इस अवसर पर विभिन्न लेखकों की 13 नई पुस्तकों का विमोचन भी मंच से किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुति कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल (पाली) और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (भरनी) के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर लोककला की छटा बिखेरी। कार्यक्रम का संचालन विजय मिश्रा ‘अमित’ ने किया.





