- एक ही फर्म, बिना जीएसटी और दर्जनों बैंक खातों में बंट रहा है सरकारी खजाने का पाई-पाई
कमल कुमार मेश्राम,राजनांदगांव। छुरिया जनपद पंचायत में फैले भ्रष्टाचार के ब्लैक सिंडिकेट की परतें जैसे-जैसे उघड़ रही हैं, वैसे-वैसे प्रशासनिक महकमे के होश उड़ने लगे हैं। इस पूरे काले खेल के केंद्र में एक ऐसा दबंग सचिव बैठा है, जिसका जनपद कार्यालय में इतना खौफ और रसूख है कि बड़े-बड़े अधिकारी भी उसके सामने आंख उठाने की हिम्मत नहीं करते। इसी प्रशासनिक धौंस और दबंगई के बल पर इस शातिर ने भ्रष्टाचार की ऐसी इबारत लिख दी है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं।
पंचायती राज अधिनियम और शासकीय सेवा आचरण नियमों के मुताबिक कोई भी कर्मचारी अपने या अपने परिवार के नाम पर व्यावसायिक फर्म बनाकर शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं ले सकता। लेकिन छुरिया के इस रसूखदार सचिव ने इन सभी कानूनी बंदिशों को ठेंगा दिखाते हुए अपने ही पिता के नाम पर एक निजी निर्माण सामग्री सप्लाई करने वाली फर्म रजिस्टर्ड करवा ली। हैरानी की बात तो यह है कि धरातल पर न तो उस नाम की कोई दुकान है और न ही कोई गोदाम, सब कुछ केवल कागजों पर चल रहा है।
छुरिया जनपद में भ्रष्टाचार का ब्लैक सिंडिकेट? सचिवों की आपसी सेटिंग से चल रहा फर्जी बिलों और कागजी विकास का ढोंग!
बिना जीएसटी और फर्जी नंबरों से हो रहे करोड़ों के वारे-न्यारे
इस फर्जी फर्म की आड़ में जो बिल लगाए जा रहे हैं, वे तकनीकी रूप से पूरी तरह अवैध और फर्जी हैं। इन बिलों पर जो जीएसटी नंबर चस्पा किया गया है, वह या तो पूरी तरह फर्जी है या अमान्य है। बिना किसी भौतिक सत्यापन के, महज आपसी सेटिंग और इस दबंग सचिव के रसूख के दम पर अन्य पंचायतों के सचिव भी इन फर्जी बिलों पर आंख मूंदकर हस्ताक्षर कर देते हैं और शासकीय खजाने से लाखों रुपये का भुगतान धड़ल्ले से पास हो जाता है।
मनी ट्रेल छुपाने दर्जनों खातों में बांटी जा रही है रकम
इस काले कारोबार का सबसे बड़ा राज यह है कि पकड़े जाने के डर से सचिव ने अपनी इस फर्जी फर्म का पैसा किसी एक आधिकारिक खाते में मंगवाने के बजाय, दर्जनों अलग-अलग बेनामी और निजी बैंक खातों में टुकड़े-टुकड़े करके ट्रांसफर कराया है। ताकि वित्तीय जांच एजेंसियों और टैक्स विभागों की नजरों से इस शातिर मनी ट्रेल को पूरी तरह छुपाया जा सके। सवाल यही है कि जब ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के वाउचर, फर्जी बिलों के सीरियल नंबर और अमान्य जीएसटी नंबरों के पुख्ता डिजिटल दस्तावेज सामने आ चुके हैं, तो फिर जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस दबंग सचिव पर मेहरबान क्यों हैं? क्या अधिकारियों की चुप्पी इस बात की गवाही दे रही है कि इस मलाईदार लूट में ऊपर से लेकर नीचे तक हिस्सेदारी तय है?
बहरहाल इस खबर के प्रकाशन के बावजूद यदि जिम्मेदार प्रशासनिक अमले ने इस दबंग सचिव के काले साम्राज्य और उसके दर्जनों फर्जी खातों की निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो *एजी खबर* अपने अगले अंक में उस दबंग सचिव का असली नाम, उसके पिता की उस फर्जी फर्म का पूरा कच्चा-चिट्ठा और उन तमाम दर्जनों बैंक खातों के नंबर सार्वजनिक कर देगा, जिसके बाद छुरिया से लेकर जिला मुख्यालय तक भूचाल आना तय है।






