कमलकांत पाटनवार
Krishna Janmashtami: नक्षत्र-रोहिणी भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसे कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) और गोकुलाष्टमी भी कहते हैं।
भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनया जाता है। इसे कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) और गोकुलाष्टमी भी कहते हैं। हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। जन्माष्टमी का यह त्योहार श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और वृंदावन में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसके साथ ही श्रीकृष्ण के शिक्षा स्थल उज्जैन और द्वारका में भी इस दिन भगवान की विशेष पूजा होती है। इन सभी स्थानों पर देशभर से भक्त भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए पहुंचते हैं।
श्रीकृष्ण की लीलाएं भक्तों को जीवन में देती है प्रेरणा
भक्त भगवान श्रीकृष्ण को अलग-अलग रूपों में पूजते हैं। इसमें वृंदावन में उनकी बाल लीला, राधा के साथ उनके प्रेम और महाभारत के दौरान अर्जुन को दिए गए उपदेश भक्तों को जीवन के हर दौर में प्रेरणा देते हैं। 2026 में जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) 04 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
माखन का कटोरा, मिश्री की थाल, मिट्टी की खुशबू, बारिश की फुहार, राधा की उम्मीद, कन्हैया का प्यार, मुबारक हो आपको जन्माष्टमी का त्योहार!!!
मां से कभी जीतने की कोशिश ना करें, खुद हार जाएं
कहानी है श्रीकृष्ण के बचपन की। शरारती तो वे बहुत थे। हमेशा किसी ग्वाले के घर में मटकी फोड़कर माखन चुरा लेते थे, अपने दोस्तों को खिला देते थे। उनकी शिकायतें लेकर गोकुल वाले रोज आते। यशोदा उलाहनें सुन-सुनकर परेशान हो गईं।
एक दिन यशोदा माखन मथ रही थीं और कृष्ण उन्हें खिलाने के लिए बुला रहे थे। यशोदा काम में लगी थीं, कृष्ण की बातें अनसुनी कर दीं। कृष्ण गुस्सा हो गए। वो ही मटकी फोड़ दी जिसमें यशोदा माखन मथ रही थीं। शिकायतों से तो वो परेशान थी हीं, मटकी फूटने से और नाराज हो गईं। उन्होंने कृष्ण को पकड़ा और आंगन में एक खंभे से सटाकर खड़ा कर दिया और रस्सी से बांधने लगीं। लेकिन, बांध नहीं पा रही थीं, क्योंकि रस्सी हर बार कुछ छोटी पड़ जाती। ये कृष्ण की लीला थी कि किसी भी तरह रस्सी उन्हें बांध नहीं पा रही थी।नतीजा, वे हारकर रोने लगीं। मां को रोता देख कृष्ण ने रस्सी उठाई और खुद को बांध लिया। अब रस्सी छोटी नहीं हुई। यशोदा की इच्छा पूरी हो गई, कृष्ण बंध गए।
कृष्ण सिखाते हैं कि कभी मां से जीतने या उन्हें हराने की कोशिश ना करें। मां पहली गुरु होती हैं। उनका सम्मान करें। रिश्तों में हमेशा जीतना जरूरी नहीं होता, कभी-कभी आप हार कर भी रिश्तों को जिता देते हैं।
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Happy Janmashtami








