जिले में नहीं संभल रहा शिक्षा विभाग! प्रशासनिक कसावट के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

  • जिले अब तक निष्क्रिय डीईओ की हुई पदस्थापना

  • नए डीईओ भी जल्द दे सकते है रिजाइन, नेता लगे मनाने

  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर जवाबदेही किसकी!

  • खंडहरनुमा भवनों में बच्चों का भविष्य लेकिन ओपन जिम पर फूंक दिए 80 लाख, पुस्तकों के वितरण में देरी क्यों

कमल कुमार मेश्राम,मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक कसावट की कमी, अधिकारियों की जवाबदेही और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की स्थिति को लेकर अब सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर जिले की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी किसकी है?

जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रही शिकायतें केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध बच्चों की पढ़ाई, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और उनके भविष्य से है। ऐसे में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

डीईओ बदलते रहे, लेकिन समस्याओं का समाधान कहां?

जिले में पूर्व में पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि अधिकारियों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय दूसरे विषयों को प्राथमिकता दी गई।

अब सवाल वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी उठ रहे हैं। यदि विभाग की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा? क्या जिला शिक्षा अधिकारी इन चुनौतियों पर विभागीय समीक्षा कर ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करेंगे, या फिर जिले की शिक्षा व्यवस्था जिम्मेदारी से बचकर रिजाइन देंगे❓

नेताओं की सिफारिशों से नियुक्तियां या व्यवस्था सुधारने की प्राथमिकता?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि जिला शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना में स्थानीय राजनीतिक प्रभाव की भूमिका रही। इसके चलते कुछ नेताओं और अधिकारियों के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठने की बातें कही जा रही हैं।

यदि पदस्थापना में राजनीतिक सिफारिशों की कोई भूमिका रही है, तो उसकी पारदर्शिता सामने आनी चाहिए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधिकारियों की नियुक्ति का आधार क्या है—प्रशासनिक अनुभव, कार्यक्षमता और जवाबदेही या राजनीतिक समीकरण! जिले की शिक्षा व्यवस्था किसी राजनीतिक खींचतान की कीमत नहीं चुका सकती। बच्चों की पढ़ाई सर्वोपरि होनी चाहिए

खंडहरनुमा भवनों के बीच बच्चों का भविष्य!

जिले के कुछ विद्यालयों की भवन एवं बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि बच्चे जर्जर या अनुपयुक्त भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं, इतना ही नही भवनविहीन शालाये भी संचालित हो रही है तो यह केवल शिक्षा विभाग की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन की चिंता का विषय है।

स्कूलों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण कराना, भवनों की मरम्मत और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा प्रत्येक विद्यालय की समस्या के समाधान की समयसीमा तय करना जरूरी है।

ओपन जिम पर 80 लाख रुपये खर्च, शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

जिले में ओपन जिम के लिए लगभग 80 लाख रुपये खर्च किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। इस खर्च की स्वीकृति, वास्तविक निर्माण कार्य, उपयोगिता और गुणवत्ता की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शिक्षा क्षेत्र की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध बजट का कितना उपयोग हुआ है। ओपन जिम और शिक्षा विभाग के बजट अलग-अलग मदों से संबंधित हो सकते हैं, इसलिए दोनों के खर्च की तुलना करने के बजाय संबंधित योजनाओं के दस्तावेजों और परिणामों की अलग-अलग समीक्षा जरूरी है।

पुस्तकें अब तक वितरित नहीं हुईं तो जवाबदेही किसकी?

विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल है। यदि जिले के किसी विद्यालय में अब तक पुस्तकें वितरित नहीं हुई हैं, तो विभाग को स्कूलवार स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

कितने विद्यार्थियों को पुस्तकें मिल चुकी हैं, कितने विद्यार्थी अब भी वंचित हैं और वितरण में देरी के क्या कारण हैं—इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आने चाहिए। शैक्षणिक सत्र में देरी से मिलने वाली पुस्तकों का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता ।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला अपनी अलग पहचान रखता है। लेकिन शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर जिले की छवि और विद्यार्थियों के भविष्य दोनों पर पड़ सकता है।

अब जरूरत है कि जिला प्रशासन केवल समीक्षा बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूलों का वास्तविक निरीक्षण करे। जर्जर भवनों, पुस्तक वितरण, शिक्षकों की उपलब्धता और विभागीय कार्यप्रणाली पर समयबद्ध कार्रवाई हो।


  • जिला प्रशासन से प्रमुख सवाल:

  • जिले के सभी विद्यालयों की भवन संबंधी समस्याओं की स्थिति क्या है?
  • सभी विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें वितरित हुई हैं या नहीं?
  • ओपन जिम पर खर्च की गई लगभग 80 लाख रुपये की राशि का पूरा विवरण क्या है?
  • पूर्व एवं वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारियों के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए?
  • शिक्षा विभाग की समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी और समयसीमा कौन तय करेगा?
  • अब जिले की जनता को आश्वासन नहीं, जमीनी स्तर पर सुधार चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, खर्च का हिसाब सार्वजनिक हो और बच्चों को सुरक्षित भवन, समय पर पुस्तकें तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। यही जिले की गरिमा और भविष्य की असली कसौटी है।

Hot Topics

Related Articles