नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। ये प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी। इसी कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की गई।प्राप्त जानकारी के अनुसार, CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली में एकत्र होने की तैयारी कर रहे थे। उनका उद्देश्य जंतर-मंतर पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका।दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि प्रस्तावित जमावड़े के लिए अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश जारी रहने पर पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लेने की कार्रवाई की।इस विरोध-प्रदर्शन के बीच CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके का नाम भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, दिपके प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाए। दिपके का दावा है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरते ही पुलिसकर्मियों ने उन्हें और उनके साथियों को हिरासत में ले लिया।उनके मुताबिक, वे CJP के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेने के उद्देश्य से दिल्ली आए थे। हालांकि, हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।अभिजीत दिपके ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो के माध्यम से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और दिल्ली पुलिस की ओर से एयरपोर्ट पर हुई इस कथित कार्रवाई को लेकर अलग से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एयरपोर्ट पर हिरासत में लेने का आरोप
अभिजीत दिपके ने दावा किया कि मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने का अवसर नहीं मिला। उनके अनुसार, फ्लाइट से उतरते ही पुलिसकर्मियों ने उन्हें और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया।यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस की ओर से एहतियाती कार्रवाई किए जाने की जानकारी मिली है।हालांकि, दिपके और उनके साथियों को किस कानूनी प्रावधान के तहत हिरासत में लिया गया, इस संबंध में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्हें एयरपोर्ट से कहां ले जाया गया और बाद में उनकी हिरासत की स्थिति क्या रही।सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किए जाने से उनके आरोप सार्वजनिक हुए हैं, लेकिन घटना की पूरी परिस्थितियों की पुष्टि संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बाद ही हो सकेगी। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग CJP के नेतृत्व में आयोजित किए जाने वाले इस विरोध-प्रदर्शन की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा थी। प्रदर्शनकारी इसी मांग को लेकर जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।मुख्य चुनाव आयुक्त का पद भारतीय निर्वाचन व्यवस्था में महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। निर्वाचन आयोग देश में चुनावों के संचालन और निगरानी का कार्य करता है।किसी संवैधानिक पदाधिकारी के इस्तीफे की मांग करना राजनीतिक विरोध का विषय हो सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में CJP की ओर से इस्तीफे की मांग के समर्थन में प्रस्तुत किए गए विशिष्ट आरोपों या दस्तावेजों का विवरण नहीं दिया गया है।इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त या निर्वाचन आयोग की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांग पर किसी प्रतिक्रिया की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था का सवाल दिल्ली में हुई इस कार्रवाई के बाद सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का विषय सामने आया है।भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था सहित निर्धारित संवैधानिक प्रतिबंधों के अधीन है।ऐसे में प्रदर्शन आयोजित करने वाले संगठनों और प्रशासन, दोनों की जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होती हैं। जहां प्रदर्शनकारियों को कानून के तहत अपनी मांगें रखने का अधिकार है, वहीं पुलिस को भी सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनसम्मत कदम उठाने होते हैं।इस मामले में पुलिस सूत्रों ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने को हिरासत की कार्रवाई का आधार बताया है। हालांकि, प्रत्येक हिरासत की कानूनी परिस्थितियों और आवश्यकता का आकलन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर स्थिति पर नजर शनिवार को दिल्ली में CJP के नेतृत्व में प्रस्तावित जंतर-मंतर मार्च के दौरान करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं मुंबई से पहुंचे कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने एयरपोर्ट पर ही हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया है।फिलहाल प्रदर्शनकारियों की अंतिम संख्या, उनकी रिहाई और आगे की पुलिस कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर CJP के कार्यकर्ताओं की मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग है, तो दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए एहतियाती कार्रवाई की है। आगे संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।






