पीएम मोदी का देशवासियों को संदेश : सभी को मिलकर ‘माँ भारती’ के दुश्मनों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें हराना चाहिए

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर ‘माँ भारती’ के दुश्मनों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें हराना चाहिए—खासकर उन ताकतों को जो राष्ट्रीय सम्मान को नुकसान पहुँचाती हैं, समाज को बांटती हैं और भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत रखती हैं। राष्ट्रीय राजधानी में विजय दशमी समारोह में शामिल होते हुए, मोदी ने भगवान राम के आदर्शों को जीवित रखने की भारत की परंपरा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा अत्याचार और आतंक के अंत का संदेश देती है, और असत्य पर शाश्वत सत्य की जीत को स्थापित करती है।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उनकी सरकार को विपक्ष और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ये लोग मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि राष्ट्रीय राजधानी और विभिन्न राज्यों की कई अन्य जगहों पर हुए ये विरोध प्रदर्शन विदेशी ताकतों के इशारे पर किए गए हैं, जो देश की प्रगति नहीं चाहतीं।

उन्होंने कहा, “हर किसी को ‘राष्ट्र प्रथम’ का संकल्प लेना चाहिए ताकि ‘माँ भारती’ के दुश्मनों की पहचान की जा सके और उन्हें हराया जा सके—विशेष रूप से उन ताकतों को जो राष्ट्रीय सम्मान को नुकसान पहुँचाती हैं, समाज को बांटती हैं और भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत रखती हैं। जब हम सत्य और मानवता के साथ खड़े होते हैं, तो अंत में जीत हमारी ही होती है।” प्रधानमंत्री ने उन भारी कठिनाइयों को भी याद किया जिनका सामना भगवान राम ने किया, लेकिन उन्होंने कभी भी सत्य और नैतिकता का मार्ग नहीं छोड़ा। भगवान राम के राज्याभिषेक और उनके वनवास—दोनों ही स्थितियों में उनके संयम को दर्शाने के लिए संस्कृत श्लोकों का हवाला देते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे भगवान राम ने हर संकट के दौरान धर्म का पालन किया और सत्य की स्थापना की। उन्होंने कहा, “भगवान राम ने दया, करुणा, प्रेम और सद्भाव के मानक स्थापित किए।”

मोदी ने कहा कि भारत “भगवान राम के आदर्शों को जीवित रखने की परंपरा” को बनाए हुए है, जो अत्याचार और आतंक के अंत की घोषणा करती है और असत्य पर शाश्वत सत्य की जीत को स्थापित करती है। उन्होंने कहा, “भगवान राम के आदर्शों को जीवित रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष, और असत्य पर शाश्वत सत्य की जीत में अटूट विश्वास — ये हमारे लिए केवल त्योहार नहीं हैं; ये भारत की जीवन-शक्ति हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने सबको सिखाया कि रास्ते की रुकावटें सफर को रोक नहीं सकतीं। उन्होंने कहा, “सामने समुद्र था और लंका दूर थी, लेकिन संकल्प अडिग था।” इसलिए, उन्होंने कहा कि भगवान राम ने लोगों की सामूहिक शक्ति को जगाया, जन-भागीदारी को अपना आधार बनाया और उपलब्ध संसाधनों को एकजुट किया, जिससे एक असंभव लगने वाला लक्ष्य भी संभव हो गया। मोदी ने कहा कि सफलता का यही मूल मंत्र है: अपनी शक्ति पर भरोसा, अपनी क्षमताओं पर विश्वास, संसाधनों का सही उपयोग और लक्ष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता। उन्होंने कहा, “हमें जन-शक्ति के बल पर जन-कल्याण के माध्यम से लोगों की हर आकांक्षा को पूरा करना है, और इसके लिए भी हमें स्वयं भगवान राम से प्रेरणा लेनी चाहिए।”

 

 

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