पुराने बस स्टैंड में गांधी जी की मूर्ति बनी असामाजिक तत्वों का अड्डा, रोज हो रहा अपमान

  • शराब की बोतलें, डिस्पोजल और पानी पाउच से पटा है परिसर, प्रशासन की अनदेखी से आक्रोश

मुंगेली। रिपोर्टर संदीप यादव।शहर के बीचों-बीच स्थित पुराने बस स्टैंड में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा आज उपेक्षा का शिकार हो गई है। कभी जो जगह श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र थी, वो अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है।

हर शाम यहां शराबियों का जमावड़ा लगता है। शराब पीने के बाद खाली बोतलें, डिस्पोजल गिलास और पानी के पाउच यहीं फेंक दिए जाते हैं। कई बार बोतलें तोड़कर कांच भी बिखेर दिया जाता है। सुबह मॉर्निंग वॉक और पूजा के लिए आने वाले बुजुर्ग और बच्चे गंदगी और टूटे कांच के बीच से गुजरने को मजबूर हैं।

स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों का कहना है कि पिछले कई महीनों से ये हालात हैं। शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सफाई व्यवस्था सिर्फ 2 अक्टूबर गांधी जयंती, 15 अगस्त, 26 जनवरी और 30 जनवरी शहीद दिवस जैसे विशेष अवसरों पर ही दिखाई देती है।


  • सवाल: बाकी 361 दिन किसकी जिम्मेदारी?

नगरवासियों का सीधा सवाल है – *”क्या सफाई सिर्फ 2 अक्टूबर, 15 अगस्त, 26 जनवरी और 30 जनवरी को ही संभव है? बाकी दिन की जिम्मेदारी किसकी है?”*

राष्ट्रपिता का अपमान रोज हो रहा है, फिर भी जिम्मेदार मौन क्यों हैं?

*प्रशासन से 3 मांगें*

लोगों ने प्रशासन से मांग की है:

1. *प्रतिमा परिसर में रोजाना सफाई की व्यवस्था हो*

2. *CCTV कैमरे लगाकर निगरानी की जाए*

3. *मूर्ति का अपमान करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो*


एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “गांधी जी ने हमें स्वच्छता और अहिंसा का संदेश दिया। उनकी ही मूर्ति के साथ ऐसा व्यवहार शर्मनाक है।”


अब देखना ये है कि प्रशासन कब जागता है और गांधी जी की गरिमा को वापस लौटाता है।

Hot Topics

Related Articles