बलौदा बाजार भाटापारा(मोहन तिवारी): एक समय था जब बरसात से पहले विशेष सफाई अभियान चलाया जाता था। नालों की सिल्ट निकाली जाती थी नालों की जमीन दिखती थी नालियों की सफाई होती थी जल निकासी के रास्तों से अतिक्रमण हटाया जाता था ताकि बारिश का पानी बिना रुके निकल सके। और आज जमीनी हकीक़त यह है कि पहली बारिश ने नगर पालिका की पोल खोल दी।
यदि अब भी शहर के नालों , तालाबों और जल निकासी तंत्र को नही बचाया गया, यदि कचरे के प्रबंध और नालों जल बहाव के श्रोतों के अतिक्रमण पर कठोर कार्रवाई नही हुई, यदि सड़क निर्माण मे वैज्ञानिक मानकों का पालन नहीं किया गया तो आने वाले समय हर बारिश बलौदा बाजार के लिए बाढ़ का दूसरा नाम बन जाएगा।
बारिश को दोष देना आसान है, लेकिन सच यह है कि पानी ने अपना रास्ता नहीं बदला, हमने उसका रास्ता बंद कर दिया। आज बलौदा बाजार पानी मे डूब गया है, बल्कि अव्यवस्थित विकास की कीमत चुका रहा है।






