बहू और प्रेमी को उम्रकैद: ससुर की करंट लगाकर हत्या करने वाले दोषियों को अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

  • ससुर की हत्या के मामले में अदालत का बड़ा फैसला

बालोद।छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर की बिजली का करंट लगाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ) ने मृतक की बहू गीताबाई निर्मलकर और उसके प्रेमी लेखराम निषाद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता फॉरेंसिक साक्ष्यों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए दोनों दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया है।

अवैध संबंधों के चलते रची गई थी खौफनाक साजिश

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि बहू गीताबाई का बड़गांव निवासी हारमोनियम शिक्षक लेखराम निषाद के साथ लंबे समय से अवैध संबंध चल रहा था। ससुर मनोहर निर्मलकर को इस रिश्ते की भनक लग चुकी थी और वह दोनों के बीच कांटा बन रहे थे। मनोहर को रास्ते से हटाने के लिए बहू और उसके प्रेमी ने मिलकर करीब आधा महीना पहले यानी 29 जून को ही पूरी योजना तैयार कर ली थी, जिसे उन्होंने 16 जुलाई को अंजाम दिया।

साइकिल से गिरने की झूठी कहानी और सबूत मिटाने का प्रयास

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने बड़ी चालाकी से इसे एक साधारण दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। उन्होंने परिवार और समाज के लोगों को गुमराह करते हुए यह अफवाह फैलाई कि बुजुर्ग मनोहर निर्मलकर की मौत साइकिल से गिरने की वजह से हुई है। बुजुर्ग के चेहरे और माथे पर मौजूद चोट के निशानों को छिपाने के लिए उन्होंने शव पर हल्दी, गुलाल और तेल का लेप लगा दिया था ताकि कोई शव को ध्यान से न देख सके और बिना किसी रुकावट के अंतिम संस्कार पूरा हो जाए।

श्मशान घाट पर ग्रामीणों की सूझबूझ से खुला राज

जब परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट लेकर पहुंचे, तो वहां माहौल बदल गया। कफ़न हटाए जाने पर कुछ ग्रामीणों को मनोहर के चेहरे और माथे पर गहरे संदिग्ध निशान दिखाई दिए, जिससे उन्हें मौत की वजह पर गहरा संदेह हुआ। ग्रामीणों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को रुकवाया और मामले की सूचना डौंडीलोहारा थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसके बाद इस मर्डर मिस्ट्री की परतें खुलती चली गईं।

वैज्ञानिक साक्ष्यों और धाराओं के तहत दोषियों पर कसा शिकंजा

साइबर सेल और तत्कालीन थाना प्रभारी की टीम ने जब संदेहियों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो बहू और उसके प्रेमी के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि हुई। कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल बिजली का खुला तार, रबर के दस्ताने, खून से सना गमछा और मोबाइल फोन बरामद किया। न्यायालय ने दोनों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या), 61(2) (आपराधिक साजिश) और 238 (साक्ष्य मिटाना) के तहत दोषी पाते हुए जेल भेज दिया है।

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