बिलासपुर CIMS में नर्सिंग स्टाफ का अनिश्चितकालीन धरना, स्वास्थ्य सेवाएं ठप

कमलकांत पाटनवार 

बिलासपुर

सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में व्यवस्थाएं उस वक्त पटरी से उतर गईं, जब नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारी अपनी 15 सूत्री (मुख्यतः आठ) लंबित मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। अस्पताल की पार्किंग स्थल पर दिए जा रहे इस धरने के कारण दूर-दूर से इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके स्वजन को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

नर्सिंग असफिसर एसोसिएशन के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन के चलते रूटीन चेकअप और वार्डों की देखरेख पर सीधा असर पड़ा है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि अब सिर्फ मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को ठोस आदेश जारी करने होंगे।

मीडिया प्रभारी अमर ज्योति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शासन स्तर पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। एसोसिएशन की सदस्य जागृति तिवारी ने भी इस बात पर जोर दिया कि कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। आगामी रणनीति के तहत कैंडल मार्च और स्कूटी रैली निकालकर शासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया जाएगा।

प्रमुख मांगें, जिन पर अड़ा नर्सिंग स्टाफ

स्टाफ नर्स का नाम बदलकर ‘नर्सिंग आफिसर’ और नर्सिंग सिस्टर का नाम ‘सीनियर नर्सिंग आफिसर’ करना।

ग्रेड पे विसंगतियों को दूर करना, नर्सिंग भत्ता बढ़ाकर 7,200 रुपये और ड्रेस भत्ता 1,800 रुपये प्रतिमाह करना।

1000 नियमित स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करना तथा लंबित पदोन्नति व समयमान वेतनमान के आदेश निकालना।

संविदा कर्मचारियों को नियमित भर्ती में प्राथमिकता, न्यूनतम वेतन 40,000 रुपये प्रतिमाह और नर्सिंग प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड 1,500 से बढ़ाकर 15,000 रुपये करना।

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