भाटापारा,प्रदेश के सातवें सबसे बड़ी आबादी वाले नगर भाटापारा का विकास पिछले कुछ वर्षों से थम सा गया है। राज्य और केंद्र स्तर पर अब तक विकास की बड़ी सौगात नहीं मिलने से लोगों में आक्रोश है। लोरमी, मुंगेली, लिमतरा, नांदघाट होकर भाटापारा सड़क मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की घोषणा हुई। इस दिशा में अब तक कोई काम नहीं हुआ। लोग संकरी सड़क पर हादसों का शिकार हो रहे हैं।
यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है। शहर में भारी ट्रैफिक दबाव है। भाटापारा से बिलासपुर की ओर बाईपास सड़क निर्माण की मांग अब तक अनसुनी है। हर साल कई लोग सड़क हादसों में घायल हो रहे हैं। कई की मौत हो रही है। भाटापारा-बिलासपुर मार्ग पर सेमरियाघाट का छोटा पुल करीब 60 साल पुराना है। इसके स्थान पर उच्च स्तरीय नया पुल नहीं बन पाया।
पिछले बजट में सेमरियाघाट शिवनाथ नदी पर उच्च स्तरीय पुल की घोषणा हुई थी। क्रियान्वयन अब तक नहीं हुआ। भाटापारा-सुहेला प्रमुख मार्ग पर डिग्गी नाला के रपटा पर आए दिन बाढ़ की स्थिति बनती है। पिछले बजट में डिग्गी नाला में उच्च स्तरीय पुल की घोषणा हुई। यह काम भी शुरू नहीं हुआ।
इससे सुहेला, हिरमी, खरोरा, भटभेरा, कुथरौद, बुड़गहन, उजीरपुर, धोबनीडीह, बासीन, अमेरी, रवेली, रावन, झीपन, केसली, भवरगढ़, लोहारी, रानीजरौद, खपरी, डिग्गी, फरहदा सहित सैकड़ों गांवों से सड़क संपर्क टूट जाता है। जनहित में डिग्गी नाला पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भेंट मुलाकात और गांव संपर्क अभियान के तहत कड़ार गांव की आमसभा में मुख्यमंत्री रहते भाटापारा बलौदाबाजार मार्ग के उन्नयन और चौड़ीकरण की घोषणा की थी।






