भिलाई (छत्तीसगढ़)दुर्ग: भिलाई के खम्हरिया स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पिछले दिनों मास हिस्टीरिया से कई छात्राएं पीड़ित थी। स्कूल की दोपहर पाली (डे-शिफ्ट) में पढ़ने वाली कक्षा 9वीं और 11वीं की लगभग 10 से 15 छात्राएं अचानक रहस्यमयी तरीके से बीमार होने लगीं। छात्राएं अचानक जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगती हैं, उनके हाथ-पैर अकड़ जाते हैं, आंखों से आंसू बहने लगते हैं और वे बेहोश हो जाती हैं।
इस चौंकाने वाली घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई और स्थानीय स्तर पर इसे अंधविश्वास व ‘भूत-प्रेत के साए’ से जोड़ा जाने लगा।
हालांकि, डॉक्टरों और साइकोलॉजी टीम की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि छात्राएं किसी बीमारी या जादू-टोने का नहीं, बल्कि ‘मास हिस्टीरिया’ (Mass Hysteria) का शिकार हुई हैं।
दोपहर की पाली में ही क्यों घट रही थी घटना?
स्कूल प्रबंधन और प्राचार्या सुनीता दीवान के अनुसार, यह अजीबोगरीब सिलसिला सबसे पहले 9 जुलाई को शुरू हुआ था। दोपहर की पाली में कक्षा 9वीं-ए की एक छात्रा को अचानक चक्कर आया और उसे स्टाफ रूम ले जाया गया। उसके कुछ ही देर बाद क्लास की दूसरी छात्राएं भी अजीब हरकतें करने लगीं और जोर-जोर से चीखते हुए बेहोश हो गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह स्थिति सिर्फ दोपहर की शिफ्ट की छात्राओं के साथ देखी गई, जबकि मॉर्निंग शिफ्ट के बच्चों या शिक्षकों में ऐसे कोई लक्षण नहीं मिले।
मेडिकल रिपोर्ट सामान्य, डॉक्टरों ने बताया ‘मानसिक तनाव’
लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए छात्राओं को तुरंत शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। डॉक्टरों की टीम ने छात्राओं के खून की जांच, सिकल सेल टेस्ट और अन्य जरूरी मेडिकल टेस्ट किए। जांच में किसी भी छात्रा के शरीर में कोई गंभीर शारीरिक बीमारी या जहर का अंश नहीं पाया गया और सभी की मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह नॉर्मल आई। करीब एक से डेढ़ घंटे के चिकित्सकीय परामर्श और आराम के बाद सभी छात्राएं पूरी तरह सामान्य हो गईं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यह मानसिक तनाव और सामूहिक घबराहट (Mass Anxiety) के कारण उत्पन्न हुआ मास हिस्टीरिया का मामला है।
काउंसलिंग का दिखा असर, लौटा बच्चों का भरोसा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग (DEO) ने तुरंत संज्ञान लिया और डॉक्टरों की एक विशेष साइकोलॉजिकल (मनोवैज्ञानिक) टीम को स्कूल भेजा। विशेषज्ञों की टीम ने स्कूल पहुंचकर प्रभावित छात्राओं और उनके सहपाठियों की लगातार काउंसलिंग (मनोवैज्ञानिक परामर्श) की। एहतियात के तौर पर स्कूल प्रशासन ने कक्षा 9वीं-ए का कमरा भी बदल दिया है।लगातार की जा रही काउंसलिंग और बीमारी के सही वैज्ञानिक कारण का पता चलने के बाद अब स्कूल से डर का माहौल पूरी तरह खत्म हो चुका है। अभिभावकों का विश्वास लौटने के बाद बुधवार को स्कूल में बच्चों की उपस्थिति 400 के पार पहुंच गई, जो घटना के वक्त घटकर बेहद कम रह गई थी।
प्रशासन की अपील: अफवाहों और अंधविश्वास से बचेंजिला प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने बैठक कर प्रभावित बच्चों के अभिभावकों से बातचीत की है और उनसे अपील की है कि वे सोशल मीडिया या स्थानीय स्तर पर फैलने वाली किसी भी तरह की अंधविश्वासी अफवाहों पर ध्यान न दें।
डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी स्थिति में बच्चों पर पढ़ाई का दबाव कम करना चाहिए, उन्हें मानसिक संबल देना चाहिए और उनके सामने इन बेहोशी की घटनाओं की बार-बार चर्चा नहीं करनी चाहिए।
क्या है मास हिस्टीरिया
मास हिस्टीरिया (Mass Hysteria), जिसे वैज्ञानिक भाषा में मास साइकोजेनिक इलनेस (Mass Psychogenic Illness) या डिसोसिएटिव डिसऑर्डर कहा जाता है, एक मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति है।
जब समूह का कोई एक संवेदनशील व्यक्ति तनाव के कारण चीखने, रोने या बेहोश होने जैसे लक्षण दिखाता है, तो उसे देखकर आसपास के अन्य लोग भी उपचेतन मन से वैसे ही लक्षण महसूस करने और दोहराने लगते हैं।
ग्रामीण इलाकों या कम जागरूक समाजों में लोग इसे अक्सर ‘भूत-प्रेत का साया’, ‘ऊपरी हवा’ या ‘माता आना’ जैसे अंधविश्वासों से जोड़ देते हैं, जबकि डॉक्टरों की नजर में यह पूरी तरह से एक इलाज योग्य मनोवैज्ञानिक स्थिति है।






