मनरेगा निर्माण में घटिया गुणवत्ता का आरोप, पहली बारिश में ही तटबंध के दो टुकड़े

बालोद/डौंडी। ग्राम पंचायत घोटिया, विकासखंड डौंडी में मनरेगा से कराए गए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शिलालेख के अनुसार कार्य 02 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पहली बारिश में तटबंध दो टुकड़ों में अलग हो गया और आगे भी दरारें पड़ने की स्थिति दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि एस्टीमेट में निर्धारित मोटे रोड की जगह पतले रोड का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण निर्माण कमजोर हुआ। ग्रामीणों ने इसे बेहद घटिया निर्माण बताते हुए तकनीकी जांच की मांग की है।

ठेकेदारी प्रथा की आशंका

ग्रामीणों का संदेह है कि कार्य मनरेगा के नियमों के तहत श्रमिकों से कराने के बजाय ठेकेदारी प्रथा से कराया गया हो सकता है। नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि उनके अनुसार यह कार्य किसी देवांगन व्यक्ति द्वारा कराया गया है। इसकी भी जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने यह भी जांच की मांग की है कि कार्य वास्तव में मनरेगा श्रमिकों से कराया गया या कागजों में मनरेगा दर्शाकर किसी अन्य व्यक्ति से निर्माण कराया गया।

इंजीनियर की निगरानी पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में इंजीनियर की घोर लापरवाही नजर आती है। उनका कहना है कि यदि इंजीनियर द्वारा मौके का नियमित निरीक्षण किया जाता तो निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और गुणवत्ता की कमी समय रहते सामने आ सकती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके का निरीक्षण करने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही कार्य की प्रक्रिया पूरी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्राम सचिव शैलेश वैद्य ने कहा—अभी भुगतान नहीं हुआ

ग्राम सचिव शैलेश वैद्य ने बताया कि निर्माण कार्य का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भुगतान से पहले निर्माण की गुणवत्ता, एस्टीमेट में निर्धारित सामग्री, मस्टर रोल और तकनीकी रिकॉर्ड की जांच की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि पहली बारिश में ही तटबंध का दो टुकड़ों में अलग होना और उसमें दरारें पड़ना निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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