भाटापारा,शहर में बुधवार को हलषष्ठी का पर्व शहर के कई मोहल्लों में मनाया गया। महिलाओं ने संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखा। हथनीपारा,नयापारा, सुभाष वार्ड, महावीर, सभी वार्डो और कॉलोनी अन्य इलाकों में घरों और मंदिरों में सामूहिक पूजा हुई।
सुबह से व्रती महिलाएं मोहल्लों में एकत्र हुईं। पूजा स्थल पर मिट्टी से सगरी (जलकुंड) बनाया गया। इसके चारों ओर बेर, पलाश, कुश और अन्य पवित्र पौधों की टहनियां सजाई गईं। मिट्टी से भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमाएं बनाकर स्थापना की गई। इसके बाद महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा कर संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की।
पूजा में छह प्रकार की भाजी समेत अन्य सामग्री अर्पित: पूजन में पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया गया। महिलाओं ने महुआ, तिवरा, गेहूं, चना, लाई, दूध, दही, नारियल और छह प्रकार की भाजी सहित अन्य सामग्री अर्पित की। पूजा के दौरान महिलाओं ने सगरी के चारों ओर बैठकर कथा सुनी और व्रत से जुड़ी परंपराओं का पालन किया।
दिनभर उपवास के बाद शाम को पूजा और कथा के बाद व्रत का पारण किया गया। कई जगहों पर महिलाओं ने पसहर चावल की खिचड़ी खाकर व्रत खोला। पर्व को लेकर बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों में भी उत्साह देखा गया। शहर के कई मोहल्लों में सामूहिक रूप से सगरी सजाकर पूजा करने से लोक परंपरा की झलक दिखी। बुजुर्ग महिलाओं ने नई पीढ़ी की महिलाओं और बच्चों को पूजा की विधि और लोक मान्यताओं की जानकारी दी। पूजा स्थलों पर सगरी के आसपास सजी सामग्री और मिट्टी की प्रतिमाएं लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। महिलाओं ने पूजा के दौरान संतान के स्वस्थ और दीर्घायु रहने की कामना की।








