भाटापारा,सिंधी समाज द्वारा गुरुवार को पारंपरिक थदड़ी पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस पर्व की खासियत यह है कि थदड़ी के दिन सिंधी समाज के घरों में चूल्हे नहीं जलाए जाते और न ही कोई गर्म भोजन बनाया जाता है। पर्व के लिए एक दिन पहले ही विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर रखे जाते हैं। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य मिलकर ठंडे भोजन का सेवन करते हैं।
थदड़ी पर्व को लेकर महिलाओं ने एक दिन पहले ही तैयारियां पूरी कर ली हैं। घरों में मीठी कोकी, नमकीन कोकी, मीठी रोटी, मसाले वाली कोकी, दही-पूड़ी, पकौड़ी, पकवान, पराठे सहित अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए हैं। इन व्यंजनों को पर्व के दिन ठंडा ही खाया जाता है। समाज में यह पर्व शीतला माता की पूजा-अर्चना से भी जुड़ा हुआ है।
रक्षाबंधन के आठवें दिन मनाए जाने वाले इस पर्व पर सिंधी समाज की महिलाएं सुबह स्नान कर निकटस्थ जलस्रोत अथवा पीपल के पेड़ के नीचे पहुंचेंगी। यहां विधि-विधान से शीतला माता की पूजा-अर्चना, कथा श्रवण, आरती और परिक्रमा की जाएगी। परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ महिलाएं पर्व की परंपराओं का निर्वहन करेंगी। पर्व की एक महत्वपूर्ण परंपरा के अनुसार पूजा के बाद मंदिर में ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है। इसके पश्चात बहन-बेटी के ससुराल में भी ठंडा भोजन भेजने की परंपरा है।








