दंतेवाड़ा। कांग्रेस आलाकमान का हर एक निर्णय स्थानीय नेताओं के लिए झटका भरा होता है। बीते दिनों 21 जून को कांग्रेस ने एक नई नियुक्ति की। जिसके तहत दंतेवाड़ा जिले में कांग्रेस संगठन को नया नेतृत्व मिला। लंबे समय से खाली पड़े जिला अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ नेता शकील मोहम्मद रिजवी की नियुक्ति की गई है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह नियुक्ति की है। इससे बस्तर की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। नई हलचल की वजह जानिए दंतेवाड़ा आदिवासी बहुल जिला है, जहां स्थानीय नेता-कार्यकर्ता कांग्रेस के लिए कड़ी मेहनत करते रहे है। चुनाव के समय हो या फिर प्रदर्शन को लेकर स्थानीय नेता ही सामने आते है। आदिवासी जिला होने के चलते वहां के नेता-कार्यकर्ता को उम्मीद रहती है कि पार्टी हमे भी कुछ बड़े पद पर बैठायेगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी में ऐसा होता कभी दिखा ही नहीं। सिर्फ पैसे लेकर नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आता रहा है। छग से लेकर दिल्ली तक यही चर्चा चलती है कि पैसे दो और नियुक्ति पाओ। कई सच्चे कांग्रेसी से यह भी सुना जा सकता है कि अब कांग्रेस पार्टी नाममात्र की पार्टी के तौर में रह गई है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में मुसलमान की ताकत एक परसेंट से भी कम है, पुराने और वरिष्ठ कांग्रेस जन और आदिवासी नेताओं ने मुसलमान को शहर अध्यक्ष बनाए जाने किया कड़ा विरोध किया है वैसे भी छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी प्रदेश में मुसलमान की संख्या तीन-चार परसेंट से ज्यादा नहीं है ऐसे में आदिवासी क्षेत्र बस्तर जैसे क्षेत्र में मुसलमान को मुखिया का पद दिया जाना मतलब संभवतः पार्टी में विरोध होना। एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कांग्रेस पार्टी से मुसलमान और मुसलमान से कांग्रेस पार्टी यह बात सच साबित हुई और इसके लिए पूरा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी आदिवासी और मूल निवासियों का भी कदर नहीं करती मुसलमान के सामने किसी की भी वैल्यू नहीं है कांग्रेस पार्टी में।






