मेरठ के सबसे खौफनाक और बर्बर ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत द्वारा ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद, दोषी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की जिंदगी मेरठ जेल के भीतर पूरी तरह सलाखों और खौफ के साए में सिमट गई है। 13 महीने तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया, 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बयानों के बाद अदालत ने इस जघन्य कृत्य को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में माना है ।
सजा के ऐलान के साथ ही अदालत परिसर से लेकर जेल प्रशासन तक हड़कंप मच गया और तत्काल प्रभाव से दोनों अपराधियों के मानवीय नाम छीनकर उन्हें नई पहचान दे दी गई। जेल के रिकॉर्ड में अब मुख्य साजिशकर्ता मुस्कान को कैदी नंबर-396 और उसके प्रेमी साहिल को कैदी नंबर-395 के रूप में दर्ज किया गया है।फांसी की सजा मुकर्रर होते ही दोनों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं और वे गहरे सदमे के साथ भारी डिप्रेशन में चले गए हैं, जिसके चलते पहली रात दोनों ने जेल में परोसा गया रात का खाना पूरी तरह छोड़ दिया और अपनी-अपनी बैरकों में रात भर फूट-फूटकर रोते रहे ।
गुरुवार की सुबह होते ही जेल प्रशासन ने दोनों पर कड़ी निगरानी रखते हुए सजायाफ्ता कैदियों के कड़े नियम लागू कर दिए। साहिल शुक्ला को सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाने वाली बैरक नंबर-15 में शिफ्ट कर दिया गया, जहाँ उसने अपनी पुरानी जींस-टीशर्ट उतारकर जेल की आधिकारिक सफेद पोशाक (कुर्ता-पजामा) पहनी और सुबह का चाय-नाश्ता करने के बाद कड़े पहरे में अन्य कैदियों के साथ जेल परिसर की बागवानी के काम में जुट गया। इसके विपरीत महिला बैरक नंबर-12 में बंद मुस्कान रस्तोगी की मानसिक स्थिति बेहद असंतुलित दिखाई दी। उसने जेल कर्मियों द्वारा दिए गए सुबह के नाश्ते को छूने से भी इनकार कर दिया, जिसके बाद जेलर के निर्देश पर तत्काल महिला काउंसलर और डॉक्टरों की टीम को उसकी काउंसलिंग के लिए भेजा गया। काउंसलर द्वारा दी गई लंबी सांत्वना और कानूनी अधिकारों की जानकारी के बाद मुस्कान ने रोते हुए थोड़ा सा नाश्ता गले से नीचे उतारा और जेल के नियमों के तहत महिला अपराधियों को दी जाने वाली क्रीम रंग की सूती पोशाक पहनी।
मुस्कान की इस बैरक में उसके साथ उसकी 11 महीने की मासूम बेटी राधा भी मौजूद है, जिसका जन्म मुकदमे की सुनवाई और पुलिस कस्टडी के दौरान ही जेल की चारदीवारी के भीतर हुआ था। काउंसलिंग के दौरान मुस्कान अपनी दो बेटियों के भविष्य को याद कर बुरी तरह बिलख पड़ी और उसने काउंसलर के सामने हाथ जोड़कर बार-बार पूछा कि क्या अब उसके पास जिंदा बचने का कोई भी रास्ता नहीं बचा है।
मुस्कान अपनी बड़ी 6 वर्षीय बेटी पीहू से मिलने के लिए तड़प उठी, जिसने अंजाने में पड़ोसियों से यह कहकर इस पूरे हत्याकांड का राज खोला था कि “पापा ड्रम के अंदर बंद हैं।” बड़ी बेटी पीहू वर्तमान में अपने नाना-नानी के पास रह रही है, जबकि मृतक मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत के परिवार ने साफ कर दिया है कि वे जेल में जन्मी छोटी बच्ची राधा को कभी नहीं अपनाएंगे क्योंकि वह उनके बेटे की नहीं बल्कि प्रेमी साहिल की है।
इस बेहद संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जेल काउंसलर ने मुस्कान को देश की न्याय प्रणाली की पूरी जानकारी दी और समझाया कि जिला अदालत के इस फैसले के खिलाफ उनके पास इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है, जब तक हाईकोर्ट इस सजा की पुष्टि नहीं करता तब तक फांसी की तामील नहीं की जा सकती।






