रायपुर। राजधानी रायपुर में 86 किलो चांदी की कथित लूट का मामला पूरी तरह फर्जी निकला। थाना कोतवाली क्षेत्र के सदर बाजार में जैन मंदिर के पीछे रहने वाले व्यापारी राहुल गोयल ने खुद ही यह कहानी रची थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उसने सट्टे में भारी रकम गंवा दी थी और व्यापार में नुकसान झेलने के बाद अपने ऊपर चढ़े कर्ज को चुकाने के लिए यह नाटक तैयार किया। पुलिस ने जब तकनीकी जांच और रिक्रिएशन ऑफ सीन के जरिए तथ्यों को जोड़ा तो पूरा मामला उजागर हो गया। ऐसे गढ़ी गई थी झूठी लूट की कहानी पुलिस के अनुसार, दिनांक 4 अक्टूबर को राहुल गोयल ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 3-4 अक्टूबर की दरम्यानी रात करीब 3 बजे दो नकाबपोश व्यक्ति उसके घर में घुस आए। उन्होंने दरवाजा खटखटाया और जब राहुल ने दरवाजा खोला तो उसे पकड़कर कुछ सुंघाया, फिर उसके हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए और करीब 86 किलोग्राम चांदी लूटकर फरार हो गए। राहुल के मुताबिक, वह करीब सात घंटे तक बंधा रहा और सुबह बड़ी मुश्किल से खुद को छुड़ाकर पड़ोसियों व पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल एक विशेष जांच टीम गठित की। जांच में फंस गया राहुल टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि राहुल द्वारा बताए गए नकाबपोश व्यक्ति कहीं भी आते-जाते नजर नहीं आए। इस पर पुलिस ने राहुल से दोबारा पूछताछ की तो उसने अपने बयान बार-बार बदले और जांच को गुमराह करने की कोशिश की। डॉक्टरों से किए गए मेडिकल परीक्षण में यह सामने आया कि उसके हाथों में रस्सी के निशान कृत्रिम रूप से बनाए गए थे और चोटें मामूली थीं। इन सब साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस ने राहुल से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और झूठ का पर्दाफाश हो गया। कर्ज और सट्टे ने बढ़ाई मुसीबत पूछताछ में राहुल ने स्वीकार किया कि उसने यह पूरी कहानी खुद गढ़ी थी। उसने बताया कि व्यापार में नुकसान होने के बाद उसने कर्ज लेकर सट्टे में पैसे लगाए, लेकिन वहां भी सबकुछ गंवा बैठा। जब कर्ज चुकाने का कोई रास्ता नहीं बचा तो उसने लूट का नाटक रचकर खुद को पीड़ित दिखाने की योजना बनाई। उसने बताया कि नुकसान की भरपाई के लिए वह कंपनी की चांदी को धीरे-धीरे ग्राहकों को बेच रहा था, ताकि रकम इकट्ठी कर सके। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि उसने चांदी कितनी मात्रा में बेची और खरीदार कौन-कौन हैं। पुलिस ने किया ‘रिक्रिएशन ऑफ सीन’ पुलिस टीम ने घटना का रिक्रिएशन किया यानी लूट की कथित स्थिति को दोबारा समझने की कोशिश की। इसमें पाया गया कि घर में जबरन घुसने या किसी संघर्ष का कोई सबूत नहीं मिला। कमरे का दरवाजा, ताले और खिड़कियां पूरी तरह सही हालत में थे। इस जांच में तकनीकी साक्ष्यों में भी कई विसंगतियां मिलीं। जैसे मोबाइल लोकेशन, समय का मेल न होना और राहुल की गतिविधियों का संदेहास्पद होना। इन सबने पुलिस को यकीन दिलाया कि पूरी कहानी मनगढ़ंत है।
आरोपी का विवरण: नाम:
राहुल गोयल अग्रवाल
पिता का नाम: हरिओम अग्रवाल
आयु: 39 वर्ष
स्थायी पता: बैंक कॉलोनी, पला रोड, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश) वर्तमान पता: जैन मंदिर के पीछे, सदर बाजार, राजधानी पैलेस, थाना कोतवाली, रायपुर
कंपनी और पृष्ठभूमि की जांच जारी पुलिस के मुताबिक, राहुल गोयल “चेन फाउंडेशन ऑफ आगरा” नामक कंपनी में कार्य करता है। यह कंपनी चांदी के उत्पाद तैयार करती है और राहुल रायपुर में रहकर ऑर्डर लेने और बिक्री का काम करता था। कंपनी के अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है कि उन्हें कब और कितनी चांदी की कमी का पता चला। यह भी जांच का विषय है कि राहुल ने कंपनी की जानकारी के बिना कितना माल बेचा। वरिष्ठ अधिकारियों की सतर्कता से खुला राज पुलिस अधिकारियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने इस झूठी लूट की कहानी का पर्दाफाश किया। कोतवाली थाना प्रभारी और विशेष जांच टीम ने लगातार 24 घंटे से अधिक मेहनत कर यह सिद्ध किया कि कोई बाहरी आरोपी नहीं था, बल्कि पूरा षड्यंत्र प्रार्थी ने खुद रचा था। अब पुलिस राहुल गोयल के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रामक सूचना देने और सबूत मिटाने से संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। रायपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक संकट या कर्ज की समस्या से घिरा हो तो कानून का सहारा लें, लेकिन झूठी कहानी गढ़कर जांच एजेंसियों को गुमराह करना गंभीर अपराध है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।





