जियाउल खान ,लखनपुर सरगुजा
- सरपंच-सचिव से कई बार गुहार लगाने के बाद भी नहीं बना राशनकार्ड
केंद्र और राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। इसके बावजूद सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदों के आश्रित ग्राम घंटा डुगु में रहने वाले कई पहाड़ी कोरवा परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। इन परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें शासकीय राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि परिवारों को अपनी जरूरत का राशन बाजार की दुकानों से पैसे देकर खरीदना पड़ रहा है। आर्थिक तंगी के बीच जीवनयापन कर रहे कोरवा परिवारों के सामने भोजन जुटाना चुनौती बन गया है।
बार-बार गुहार, फिर भी नहीं बना राशन कार्ड
प्रभावित पहाड़ी कोरवा परिवारों का आरोप है कि उन्होंने राशन कार्ड बनवाने के लिए सरपंच और सचिव से कई बार गुहार लगाई। उन्हें हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक राशन कार्ड नहीं बन सका है। ग्रामीणों के मुताबिक, राशन कार्ड नहीं होने से वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरी में दुकानों से राशन खरीदकर परिवार का पेट पालना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि सीमित आय और आर्थिक परेशानियों के बीच बाजार से राशन खरीदना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद में वे लगातार जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदारों से संपर्क कर रहे हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
प्रधानमंत्री जनमन योजना का उद्देश्य भी सवालों के घेरे में
विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) संचालित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य इन समुदायों तक पक्का मकान, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, संचार सुविधा और आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। सरपंच सचिव और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकार की योजनाओं का लाभ पहाड़ी कोरबा परिवारों को नहीं मिल पा रहा है।
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों में शामिल है। ऐसे में इस समुदाय के परिवारों को खाद्य सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना विशेष महत्व रखता है। लेकिन घंटा दुगु के प्रभावित परिवारों की स्थिति ने जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों की पहचान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शोभित कोरवा, अमरनाथ मान साय सहित अन्य पहाड़ी कोरवा परिवार परेशान
आश्रित ग्राम घंटा डुगु में निवास करने वाले शोभित कोरवा, अमरनाथ मान साय सहित अन्य पहाड़ी कोरवा परिवारों के राशन कार्ड नहीं होने से इन परिवारों को सरकारी राशन नहीं मिलने के कारण बाजार से राशन खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते जिम्मेदारों द्वारा उनकी समस्या पर ध्यान दिया गया होता, तो उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
एक ओर सरकार विशेष पिछड़ी पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवार के जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर पात्र परिवारों को राशन कार्ड जैसी आवश्यक सुविधा के लिए भटकना पड़ रहा है। इससे पंचायत स्तर पर हितग्राहियों की समस्याओं के निराकरण और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। विदित हो कि आश्रित ग्राम घंटा डुगु में समस्या के समाधान हेतु जन समस्या निवारण शिविर लगाया गया था परंतु निवास करने वाले कई पहाड़ी कोरबा परिवार आज भी शासन की योजनाओं से वंचित नजर आ रहे हैं।
ऐसे में शासन प्रशासन को चाहिए कि मामले को गंभीरता से लेते हुए घंटा डुगु में निवासरत पहाड़ी कोरवा परिवारों की वास्तविक स्थिति की जांच करें। पात्र परिवारों के राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न मिल सके और भोजन के लिए आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधाएं देने का दावा कर रही है, तो आखिर घंटा डुगु के पहाड़ी कोरवा परिवार राशन कार्ड जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित क्यों हैं?
- लखनपुर एसडीएम राम राज सिंह को फोन किया गया परंतु मीटिंग में होने के कारण इस संबंध में चर्चा नहीं हो सका।







