विभाग के नाम से ‘आदिम जाति’ हटाने पर भड़का समाज

बलौदाबाजार ,राज्य सरकार द्वारा आदिम जाति विकास विभाग का नाम परिवर्तित कर जनजातीय कार्य विभाग किए जाने के फैसले को लेकर बलौदाबाजार जिले में आदिवासी समाज का आक्रोश भड़क उठा है। सर्व आदिवासी समाज के जिला प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर कुलदीप शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन प्रेषित किया।

विभाग का पुराना नाम यथावत बहाल रखने की पुरजोर मांग उठाई। सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि आदिम जाति केवल किसी प्रशासनिक विभाग का नाम मात्र नहीं है। यह आदिवासी समाज की सदियों पुरानी ऐतिहासिक पहचान, रूढ़ीगत परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में बिना सामाजिक सहमति के अचानक नाम बदलने से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। बता दें कि प्रदेश में 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। इस निर्णय की खबर बाहर आते ही प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में आदिवासी समाज के भीतर असंतोष के स्वर गूंजने लगे हैं। बलौदाबाजार में सर्व आदिवासी समाज ने सरकार को चेताया है कि ऐतिहासिक मान-सम्मान, संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाना बेहद जरूरी है।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा को ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलेश ध्रुव, जिलाध्यक्ष भूपेंद्र ध्रुवंशी, जिला उपाध्यक्ष भानु ध्रुव, जिला सचिव थानू ध्रुव, युवा प्रभाग के जिलाध्यक्ष संतोष नेताम प्रमुख रूप से शामिल थे। इनके अलावा लवन महासभा अध्यक्ष शिव सिंह नेताम, कृष्णा ध्रुव, श्यामबाबू ध्रुव, मूरीत राम ध्रुव, तीज राम ध्रुव, संतोष ध्रुव, चंद्रेश ध्रुव सहित बड़ी संख्या में समाज के अन्य प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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