- शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर दी गई श्रद्धांजलि
राजकुमार अग्रवाल,महासमुंद :- स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व ‘हर घर तिरंगा’, ‘वंदे मातरम’ एवं ‘भारत विभाजन की विभीषिका-स्मरण दिवस’ पर आधारित तीन दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन जिला मुख्यालय के लोहिया चौक में किया गया है। प्रभारी एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयाल दास बघेल की मौजूदगी में बीटीआई रोड से लोहिया चौक तक मौन जुलूस निकाला गया तथा शहीदों और सेनानियों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। इस अवसर पर विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ विमल चोपड़ा,जिला स्काउट एवं गाइड संघ के अध्यक्ष श्री येतराम साहू, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवीचंद राठी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती हुलसी चंद्राकर, राज्य मुख्य आयुक्त भारत स्काउट एवं गाइड संघ श्री इंद्रजीत सिंह गोल्डी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण मौजूद रहे। 
विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, राष्ट्रीय ध्वज की गौरवगाथा, देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता तथा भारत के गौरवशाली इतिहास से संबंधित छायाचित्रों को आकर्षक एवं जानकारीपूर्ण ढंग से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही भारत विभाजन की विभीषिका से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को भी छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में ‘हर घर तिरंगा अभियान के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान एवं देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया जा रहा है। वहीं वंदे मातरम की थीम के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को स्मरण किया जा रहा है।
यह प्रदर्शनी 14 अगस्त 1947 में हुए अक्षुण्ण भारत देश के विभाजन के दंश को प्रदर्शित करती है, जिसे सम्पूर्ण देशवासियों ने झेला। विभाजन के साथ ही देश के अनेक हिस्सों में दंगे, हिंसा तथा वैमनस्यता फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप पूरा देश नफरत की आग में झुलस गया। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से धार्मिक उन्माद सम्पूर्ण देश में फैल गया। छायाचित्रों के माध्यम से बेहतर ढंग से विस्थापितों की पीड़ा और दर्द को प्रदर्शित करने का बेहतर प्रयास किया गया है। प्रदर्शनी में ‘हर घर तिरंगा एवं वंदे मातरम की थीम पर दर्शाए गए छायाचित्रों में बंगदर्शन पत्रिका के उपन्यास ‘आनंद मठ’ में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने पहली बार वंदे मातरम् शब्द का इस्तेमाल किया, जो आजादी के संघर्ष के दौर से राष्ट्र की आवाज बन चुका है। इसी नारे की अगुवाई में आजादी के परवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी, जिनका ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता।












