शिक्षकों के ट्रांसफर पर सियासत तेज: दीपक बैज बोले- ‘वसूली के लिए जारी हुई लिस्ट’

रायपुर । छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के तबादले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार को करीब 700 शिक्षकों के समन्वय से तबादले किए जाने के बाद अब कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। बिना स्पष्ट तबादला नीति के इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, तो भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने पलटवार करते हुए तबादलों को जरूरत और आवेदन के आधार पर लिया गया फैसला बताया है।

दीपक बैज बोले- ‘ट्रांसफर उद्योग बनाया जा रहा’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने शिक्षकों के तबादले को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर ट्रांसफर करना ही था तो शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले किया जाना चाहिए था।

बैज ने आरोप लगाया कि शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद अब तबादला सूची जारी करने का उद्देश्य केवल वसूली और पैसे कमाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तबादले को एक तरह का ‘उद्योग’ बनाया जा रहा है।

कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद शिक्षकों के ट्रांसफर का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

पुरंदर मिश्रा ने किया पलटवार

दीपक बैज के आरोपों पर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में आवश्यकता थी और जिन लोगों के आवेदन आए थे, उनका परीक्षण करने के बाद शिक्षा विभाग ने तबादले किए हैं।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि सरकार किसी भी तबादले के लिए दीपक बैज से पूछे। उन्होंने कहा कि “जो आवश्यकता थी, जो आवेदन था, तब शिक्षा विभाग ने ट्रांसफर किया है।”

‘कांग्रेस के कार्यकाल में इंडस्ट्रीज चलती थीं’

भाजपा विधायक ने कांग्रेस के कार्यकाल पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय ‘इंडस्ट्रीज’ चलती थीं, जबकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रक्रिया के तहत आवेदन लिए जाते हैं, उनका परीक्षण होता है और उसके बाद निर्णय किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार के सामने जो आवेदन और आवश्यकता आती है, उसी के आधार पर तबादले का फैसला किया जाता है।

करीब 700 शिक्षकों के तबादले से उठा विवाद

बता दें कि शिक्षा विभाग ने शनिवार को करीब 700 शिक्षकों के समन्वय से तबादले किए हैं। इन तबादलों को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि प्रदेश में नियमित तबादला नीति के तहत प्रक्रिया नहीं चल रही है।

तबादला सूची जारी होने के बाद शिक्षकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर तबादले किस आधार पर किए गए और आवेदन की प्रक्रिया क्या रही। वहीं, सरकार की ओर से इसे आवश्यकता और प्राप्त आवेदनों के परीक्षण के बाद लिया गया फैसला बताया जा रहा है।

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