राजनांदगांव।राजनांदगांव में लगभग आठ साल पहले हुए घनश्याम विश्वकर्मा गोलीकांड में अदालत ने एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने मामले की गंभीरता और पूर्व नियोजित साजिश को ध्यान में रखते हुए तीनों मुख्य आरोपियों नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी और भरत साहू को हत्या के प्रयास तथा आपराधिक साजिश का दोषी पाया है। न्यायालय ने इन तीनों अपराधियों को कठोर कारावास के साथ सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई है और साथ ही आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
दिनदहाड़े कोर्ट से लौटते वक्त रास्ते में रोककर मारी गई थी गोली
यह सनसनीखेज वारदात इक्कीस नवंबर दो हजार सोलह की दोपहर करीब सवा चार बजे घटित हुई थी। प्रार्थी घनश्याम विश्वकर्मा अपने एक साथी दीपक राजपूत के साथ जिला न्यायालय में पेशी खत्म होने के बाद मोटरसाइकिल से वापस अपने घर की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान बसंतपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इंद्रानगर चौक के पास पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उनका रास्ता रोक लिया। पुरानी रंजिश और जान से मारने की नीयत के चलते नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली ने अपने पास रखे अवैध देसी कट्टे से घनश्याम पर सीधे फायर कर दिया, जिससे गोली सीधे उनके दाहिने कंधे पर जा लगी। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे, जबकि घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई गई।
पुलिस की पुख्ता चार्जशीट और कड़े साक्ष्यों के आधार पर मिली सजा
वारदात के ठीक बाद पीड़ित के भाई संतोष विश्वकर्मा ने बसंतपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष चश्मदीद गवाहों, घटना स्थल से बरामद कट्टे व जिंदा कारतूस और डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने इन सभी वैज्ञानिक और चश्मदीद सबूतों को सही मानते हुए मुंकू नेपाली को जानलेवा हमले, साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा दी, जबकि दिनेश माहेश्वरी और भरत साहू को हमले की साजिश रचने का बराबर का दोषी मानते हुए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।








