राजनांदगांव। कोकपुर में कथा के तीसरे दिवस सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने आचार्य पं. युवराज पाण्डेय के श्रीमुख से कथा का श्रवण किये। शिवमहापुराण कथा की शुरुआत आरती के साथ व भोले बाबा के भजन के साथ किया गया।
आचार्य पं युवराज पाण्डेय ने अपने तीसरे दिवस की कथा में बताया कि शिव महापुराण एक प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथ है, जो भगवान शिव की महिमा और उनके अवतारों का वर्णन करता है, यहां शिव महापुराण का सार है। शिव महापुराण में भगवान शिव की उत्पत्ति और उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। यह बताया गया है कि शिव आदि और अनंत हैं, और वे सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक हैं। शिव महापुराण में शिव के विभिन्न अवतारों का वर्णन किया गया है, शिव महापुराण में शिव की भक्ति और पूजा के महत्व का वर्णन किया गया है। यह बताया गया है कि शिव की भक्ति और पूजा से व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होता है, जो भी भक्त भगवान शिव को सच्ची श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते है, उनकी हर इक्छा पूरी होती है।
शिव महापुराण में शिव के विभिन्न मंत्र और स्तोत्र का वर्णन किया गया है, जिन्हें जपने से व्यक्ति को शिव की कृपा प्राप्त होती है। कलयुग में सबसे सार मंत्र जिन्हें किसी भी समय किसी भी परिस्थितियों में जपा जा सकता है, हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे, हरे राम, हरे राम, राम-राम हरे-हरे। 16 अक्षर का महामंत्र हर व्यक्ति को जपना चाहिए।
शिव महापुराण एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो भगवान शिव की महिमा और उनके अवतारों का वर्णन करता है। यह ग्रंथ शिव की भक्ति और पूजा के महत्व को भी बताता है। संगीतमई कथा में श्रोता जमकर झूमे।





