साल 1979। हवाई (Hawaii) के पाँच दोस्त स्कॉट मूरमैन, पैट वेन्सिंक, पैट्रिक वेन्सिंक, बिली मेल्चर और पीटर होड्स एक छोटी 17 फुट लंबी मछली पकड़ने वाली नाव “सारा जो (Sarah Joe)” पर सवार होकर समुद्र में निकले। यह बस एक सामान्य मछली पकड़ने की यात्रा थी। मौसम साफ था और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद वे आधुनिक इतिहास के सबसे रहस्यमय समुद्री हादसों में से एक का हिस्सा बन जाएंगे।
नाव के रवाना होने के कुछ समय बाद प्रशांत महासागर में अचानक एक शक्तिशाली तूफान आ गया। 50 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चलती हवाएँ और ऊँची-ऊँची लहरें समुद्र को बेहद खतरनाक बना चुकी थीं। फिर अचानक सारा जो का दुनिया से संपर्क टूट गया।
न कोई रेडियो संदेश मिला, न कोई आपातकालीन संकेत, न नाव का कोई सुराग। ऐसा लगा मानो विशाल प्रशांत महासागर ने पूरी नाव और उसमें सवार पाँचों लोगों को निगल लिया हो।
इस घटना के बाद हवाई के इतिहास के सबसे बड़े खोज अभियानों में से एक चलाया गया। अमेरिकी तटरक्षक बल (U.S. Coast Guard), नौसेना के विमान और कई निजी नावें हजारों वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र में लगातार खोज करती रहीं। दिनों की तलाश हफ्तों में बदल गई, लेकिन न नाव मिली, न उसके यात्री। आखिरकार पाँचों को मृत मान लिया गया और मामला एक अनसुलझे रहस्य के रूप में बंद कर दिया गया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
करीब 10 साल बाद, 1988 में, प्रशांत महासागर के बेहद दूर और निर्जन टाओन्गी एटोल पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों को समुद्र तट पर एक टूटी हुई नाव के अवशेष दिखाई दिए। यह स्थान हवाई से लगभग 3,000 किमी दूर है और दुनिया के सबसे अलग-थलग द्वीपों में गिना जाता है। जाँच में पता चला कि यह मलबा उसी लापता नाव सारा जो का था।
मलबे की खोज ने सभी को चौंका दिया, लेकिन असली रहस्य तो इसके बाद सामने आया।
नाव के अवशेषों से कुछ दूरी पर शोधकर्ताओं को पत्थरों से घिरी एक छोटी-सी कब्र मिली। कब्र के ऊपर एक साधारण लकड़ी का क्रॉस लगा हुआ था। यह कोई प्राकृतिक दृश्य नहीं था; साफ था कि किसी ने जानबूझकर वहाँ एक व्यक्ति को दफनाया था।
जब वैज्ञानिकों ने उस कब्र की जाँच की, तो उसमें मिले अवशेषों की पहचान पाँच लापता मछुआरों में से एक स्कॉट मूरमैन के रूप में हुई।
लेकिन सवाल यह था कि उन्हें दफनाया किसने?
टाओन्गी एटोल पर कोई स्थायी आबादी नहीं रहती। वहाँ न कोई गाँव है, न बस्ती और न ही नियमित रूप से लोगों का आना-जाना। अगर स्कॉट और उनके साथी किसी तरह तूफान से बचकर इस द्वीप तक पहुँच गए थे, तो क्या उनके साथियों ने ही उन्हें दफनाया? अगर हाँ, तो फिर बाकी चार लोग कहाँ गए? उनका आज तक कोई सुराग क्यों नहीं मिला?
और अगर पाँचों की मौत समुद्र में ही हो गई थी, तो फिर स्कॉट की कब्र किसने बनाई? क्या कोई मछुआरा या शोध दल वर्षों बाद वहाँ पहुँचा और उसने मानवता के नाते उनका अंतिम संस्कार कर दिया? या फिर कोई ऐसा आगंतुक वहाँ आया, जिसकी मौजूदगी कभी दर्ज ही नहीं हुई?
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री धाराएँ नाव के मलबे को हजारों किलोमीटर दूर बहाकर टाओन्गी एटोल तक ले आई होंगी। यह भी एक संभावना मानी जाती है कि स्कॉट के अवशेष किनारे पर पहुँचने के बाद किसी बाद के आगंतुक ने उन्हें दफनाया हो। लेकिन इस सिद्धांत को साबित करने के लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।
आज, घटना के कई दशक बाद भी, बाकी चार दोस्तों का क्या हुआ यह एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है। उनका कोई सत्यापित निशान कभी नहीं मिला।शायद यही वजह है कि “सारा जो” की कहानी दुनिया के सबसे रहस्यमय समुद्री मामलों में गिनी जाती है। क्योंकि कभी-कभी समुद्र सब कुछ अपने पास नहीं रखता। वह कुछ टुकड़े वापस भी लौटा देता है। एक टूटी हुई नाव, एक भूली हुई कब्र और एक नाम… लेकिन इतना कभी नहीं बताता कि उस कहानी का अंत आखिर कैसे हुआ।






