रायपुर (सौरभ सिंह ठाकुर)।रायपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी आम नागरिकों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। व्यस्त मार्गों, चौक-चौराहों और बाजारों में मवेशियों की मौजूदगी से यातायात प्रभावित हो रहा है तथा दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इस समस्या को लेकर नगर निगम की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राजधानी रायपुर के प्रमुख मार्गों, बाजारों और चौक-चौराहों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा अब आम दृश्य बन चुका है। सुबह और शाम के व्यस्त समय में सड़क के बीच बैठे या घूमते मवेशियों के कारण वाहन चालकों को अचानक गति कम करनी पड़ती है, जिससे कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह समस्या और अधिक गंभीर है क्योंकि मामूली चूक भी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
रायपुर ही नहीं, बल्कि दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव तथा प्रदेश के अन्य शहरों में भी ऐसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। सड़कों पर खुले घूमते मवेशी यातायात व्यवस्था को प्रभावित करने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बने हुए हैं। इस समस्या पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भी पूर्व में चिंता जता चुका है और सड़कों पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को गंभीर विषय माना गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा समय-समय पर मवेशियों को पकड़ने की कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन उसका स्थायी असर दिखाई नहीं देता। कुछ दिनों बाद वही स्थिति दोबारा देखने को मिलती है। लोगों का मानना है कि केवल अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशु मालिकों की जवाबदेही तय करने, नियमित निगरानी करने और प्रभावी गौशाला व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
नगर निगम का दायित्व केवल सड़कों से मवेशियों को हटाना ही नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना भी है जिससे वे दोबारा मुख्य मार्गों पर न लौटें। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय निकाय, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन के समन्वय से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
प्रदेश सरकार ने भी अधिकारियों को सड़कों पर आवारा मवेशियों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए हैं, लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि इन निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर लगातार और व्यापक रूप से दिखाई देना चाहिए। जब तक नियमित कार्रवाई, पशु मालिकों पर आवश्यक दंडात्मक प्रावधान और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक यह समस्या बनी रह सकती है।
आवारा मवेशियों का मुद्दा अब केवल यातायात का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है। नागरिकों को उम्मीद है कि नगर निगम और संबंधित विभाग इस दिशा में ठोस एवं दीर्घकालिक कदम उठाकर लोगों को सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराएंगे।






