- बासागुड़ा–पुसवाका मार्ग को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, कलेक्टर को सौंपा आवेदन; सड़क के साथ खेतों तक बिजली और सिंचाई सुविधा की भी मांग
बीजापुर (असलम रज़ा)। सरकार गांवों को सड़क से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के दावे करती है, लेकिन बीजापुर के ग्रामीण आज भी सड़क और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बासागुड़ा से पुसवाका तक सड़क निर्माण अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अप्रैल-मई 2026 में शुरू हुआ निर्माण कार्य बारिश के दौरान बंद हुआ, लेकिन बारिश के बाद भी काम दोबारा शुरू नहीं किया गया। आखिर सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों को आज भी एक पक्की सड़क के लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा?
सड़क की बदहाली से परेशान चिपुरभट्टी, पुसवाका, गगनपल्ली और आसपास के गांवों के ग्रामीणों में नाराजगी है। इसी नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अधूरे सड़क निर्माण को जल्द पूरा कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, राशन और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंचने का रास्ता है। जब यही रास्ता अधूरा हो, तो सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक आसानी से कैसे पहुंचेगा?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बासागुड़ा से पुसवाका तक सड़क निर्माण और मिट्टी-मुरमीकरण का काम शुरू किया गया था। लेकिन बारिश के कारण काम बंद हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बाद भी निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं हुआ। करीब 10 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर काम अधूरा रहने से ग्रामीणों की परेशानी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर से गुजरना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। राशन और दूसरी जरूरी सामग्री गांवों तक पहुंचाने में भी दिक्कतें आती हैं। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क निर्माण के लिए योजना और काम शुरू करने की प्रक्रिया मौजूद है, तो फिर निर्माण पूरा कराने में देरी क्यों हो रही है?
किसानों के खेतों तक न बिजली, न सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था
ग्रामीणों की मांग केवल सड़क तक सीमित नहीं है। चिपुरभट्टी क्षेत्र के किसानों ने खेतों में सिंचाई के लिए बोरवेल खनन और बिजली लाइन का विस्तार करने की मांग भी उठाई है। किसानों के अनुसार, सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से उन्हें बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। खेतों तक बिजली लाइन नहीं पहुंचने और बोरवेल की कमी के कारण फसलों को समय पर पानी देना मुश्किल हो जाता है।
किसानों का कहना है कि यदि खेतों तक बिजली पहुंचाई जाए और पात्र किसानों को सरकारी योजनाओं के तहत बोरवेल की सुविधा मिले, तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खेती की संभावनाएं सीमित हो रही हैं।
- आवेदन सौंपकर उठाए सवाल, अब कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी को निर्देश देकर बासागुड़ा–पुसवाका सड़क का काम तत्काल शुरू कराया जाए। साथ ही किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं का निराकरण कर खेतों तक बिजली लाइन पहुंचाने और बोरवेल की व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अब सवाल जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से है कि अधूरे निर्माण को पूरा करने की समयसीमा क्या है? काम बंद होने के बाद उसकी समीक्षा किस स्तर पर हुई? ग्रामीणों को सड़क कब तक मिलेगी और किसानों के खेतों तक बिजली व सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे?
ग्रामीणों ने अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचा दी है। अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम शुरू होने का इंतजार है। सड़क, बिजली और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आखिर ग्रामीण कब तक इंतजार करते रहेंगे?







