सड़क पर मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों पर होगी सख्ती, जुर्माने के साथ पुलिस कार्रवाई की तैयारी

बलौदाबाजार। दूध निकालने के बाद गाय-भैंसों को सड़कों और मुख्य मार्गों पर खुला छोड़ने वाले पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नगरीय प्रशासन ने मवेशियों को पकड़ने और उनके मालिकों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने की तैयारी की है। सड़क पर घूमते पाए जाने वाले मवेशियों के ईयर-टैग के जरिए पशुपालकों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित मालिक पर जुर्माना लगाने के साथ जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई भी की जा सकती है।

नगर पालिका और नगर पंचायतों को विशेष अभियान चलाकर सड़कों से मवेशियों को हटाने, उन्हें निर्धारित कांजी हाउस या शेल्टर में पहुंचाने और कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान की निगरानी के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय में नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इस अभियान में पुलिस और नगर सेना का सहयोग भी लिया जाएगा।

ईयर-टैग से होगी पशुपालकों की पहचान

अभियान में मवेशियों की पहचान पर विशेष जोर दिया जाएगा। सड़क पर पकड़े गए पशुओं के कान में लगे ईयर-टैग के माध्यम से उनके मालिक का पता लगाया जाएगा। पशुओं की टैगिंग और उससे जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। मवेशियों को कांजी हाउस या शेल्टर में जमा करने पर नियमानुसार रसीद जारी करने पर जोर दिया गया है। नोडल अधिकारी पशुओं की धरपकड़, पहचान, शेल्टर में पहुंचाने और संबंधित पशुपालकों पर की जाने वाली कार्रवाई की निगरानी करेंगे। अभियान की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा महत्व

आवारा मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 31 जुलाई 2026 के निशा बनाम म्युनिसिपल काउंसिल संगरूर मामले के फैसले के बाद यह कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने इस समस्या को सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए पशुओं की टैगिंग, रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, सुरक्षित शेल्टर और दुर्घटनाओं में मुआवजे की व्यवस्था जैसे उपायों पर जोर दिया है। साथ ही, पशुओं को अनुपयोगी होने पर सड़कों पर छोड़ने वाले मालिकों की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता भी बताई गई है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

बलौदाबाजार जिले में अगस्त 2024 में भी सड़कों और गलियों में बार-बार मवेशी छोड़ने वाले तीन पशु मालिकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद सड़कों पर मवेशियों की मौजूदगी दुर्घटनाओं का कारण बन रही है।

जून 2024 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 317 सड़क दुर्घटनाओं में 155 लोगों की मौत और 224 लोग घायल हुए थे। बताया गया कि इनमें करीब एक तिहाई हादसे सड़क पर बैठे मवेशियों के कारण हुए थे। जुलाई 2026 में गिधौरी-बरपाली मार्ग पर भी मवेशी से बाइक टकराने के बाद एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। डायल-112 की टीम ने उसे अस्पताल पहुंचाया था।

नियमों के तहत होगी कार्रवाई

मुख्य नगर पालिका अधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नगरीय निकाय विशेष अभियान चलाएगा। सड़कों पर घूमते पाए जाने वाले मवेशियों को निर्धारित कांजी हाउस और शेल्टर में भेजा जाएगा। ईयर-टैग के माध्यम से पशुपालकों की पहचान कर नियमानुसार जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जाएगी।

नगरीय प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य सड़कों को मवेशियों से मुक्त करना, यातायात को सुरक्षित बनाना और पशुपालकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।

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