सीपत के तहसील परिसर से सटकर दो मंजिला मकान, अब तीसरी मंजिल की तैयारी; बड़ा सवाल… बाउंड्री बनी तो रास्ता कहां से होगा?.. आखिर जिम्मेदारों का ध्यान किधर

कमलकांत पाटनवार 

बिलासपुरः– नवीन तहसील भवन परिसर से लगे निजी भूखंड पर दो मंजिला मकान का निर्माण पूरा होने के बाद अब तीसरी मंजिल का काम चलने की बात सामने आई है। हैरानी की बात यह है कि मकान तक पहुंचने के लिए फिलहाल तहसील परिसर के भीतर से होकर रास्ता इस्तेमाल किए जाने की जानकारी है। मकान के निचले हिस्से में दुकान का निर्माण भी किया गया है। ऐसे में निर्माण की अनुमति, भूमि की स्थिति और आवागमन के रास्ते को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला सीपत के नवीन तहसील भवन के सामने का है, जहां तहसील परिसर से लगी निजी जमीन पर दो मंजिला भवन खड़ा हो चुका है। अब भवन में तीसरी मंजिल का निर्माण किए जाने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि निजी भवन तक आने-जाने के लिए वर्तमान में तहसील परिसर के अंदर से होकर रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा है। भवन के निचले हिस्से में दुकान भी बनाई गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण के साथ आवागमन के लिए वैध और स्थायी रास्ते की व्यवस्था है? यदि रास्ता तहसील परिसर से होकर है तो इसकी अनुमति किस स्तर से दी गई है, यह भी जांच का विषय है।

बाउंड्री बनी तो बंद हो सकता है वर्तमान रास्ता……

मामला इसलिए और महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि नवीन तहसील भवन परिसर में बाउंड्रीवाल यानी अहाता निर्माण की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार इसके लिए एनटीपीसी की ओर से राशि उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है और निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। ऐसे में यदि प्रस्तावित बाउंड्रीवाल की जद में वर्तमान आवागमन वाला रास्ता आता है, तो निजी भवन में रहने वाले लोगों और दुकान तक पहुंचने का रास्ता प्रभावित हो सकता है। बाउंड्री बनने के बाद आखिर मकान तक पहुंचने का रास्ता कहां से होगा? यह सवाल अब सबसे बड़ा बन गया है।

निर्माण पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं..?

तहसील भवन के सामने और परिसर से सटे क्षेत्र में दो मंजिला भवन का निर्माण होने के बाद अब तीसरी मंजिल का काम चल रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्माण के दौरान संबंधित अधिकारियों ने भवन की अनुमति, भूमि की स्थिति और रास्ते को लेकर क्या जांच की? यदि तीसरी मंजिल का निर्माण किया जा रहा है तो इसके लिए आवश्यक अनुमति और भवन संबंधी दस्तावेजों की स्थिति भी स्पष्ट होना जरूरी है। वहीं, तहसील परिसर और निजी जमीन की वास्तविक सीमा भी मौके पर सीमांकन के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

बाउंड्री निर्माण से पहले सीमांकन जरूरी……

स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील परिसर में बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरु होने से पहले पूरे क्षेत्र का विधिवत सीमांकन कराया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि तहसील की जमीन की वास्तविक सीमा कहां तक है, निजी भवन किस भूमि पर बना है और भवन तक पहुंचने के लिए वैध रास्ता कौन-सा है। यदि इन बिंदुओं को अभी स्पष्ट नहीं किया गया तो भविष्य में बाउंड्री निर्माण के बाद आवागमन और जमीन की सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि निर्माण और बाउंड्रीवाल दोनों की स्थिति का मौके पर परीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करे।

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