₹20 के लिए बालोद में सरपंच-उपसरपंच का सामाजिक बहिष्कार, छत्तीसगढ़ का अनोखा मामला

बालोद।छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सामाजिक बहिष्कार का एक अनोखा मामला सामने आया है। डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम पंचायत किसमा में ग्रामीणों ने सरपंच, उपसरपंच और दो पंचों का सामूहिक बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि इन जनप्रतिनिधियों को न तो खेतों में ट्रैक्टर जाने दिया जाएगा और न ही गांव के दुकानदार उन्हें सामान बेचेंगे।

मामले की शिकायत जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और पुलिस अधीक्षक (SP) से भी की गई है। जिले में इस तरह का मामला पहली बार सामने आने की बात कही जा रही है।

किन जनप्रतिनिधियों का किया गया बहिष्कार?

ग्रामीणों ने जिन जनप्रतिनिधियों का बहिष्कार किया है, उनमें सरपंच डोमेश्वरी यादव, उपसरपंच भालती साहू, पंच डामेश्वर प्रसाद पटेल, पंच भीमनिषाद शामिल हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में लंबे समय से टैक्स वसूली और रोजगार सहायक से जुड़े मुद्दों पर विवाद चल रहा था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती गई।

क्या है विवाद की जड़?

जानकारी के अनुसार पंचायत में टैक्स वसूली को लेकर विवाद शुरू हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की ओर से प्रति परिवार 20 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से टैक्स लिए जाने की बात सामने आई थी।

बताया जा रहा है कि 5 नवंबर 2025 को टैक्स को लेकर पंचायत में विवाद हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों ने टैक्स देने से इनकार किया, जिसके बाद मामला ग्राम सभा तक पहुंच गया।

अगले दिन राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में भी विवाद सुलझाने की कोशिश हुई, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।

रोजगार सहायक पर कार्रवाई नहीं, बढ़ा विवाद

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के रोजगार सहायक के खिलाफ शिकायतें की गई थीं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी बात को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती गई और अंततः जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों का दावा है कि बहिष्कार के बाद गांव में सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर तनाव की स्थिति बन गई है।

बहिष्कार के बाद लगाए गए प्रतिबंध

ग्रामीणों द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार सरपंच और अन्य बहिष्कृत जनप्रतिनिधियों से गांव के लोग बातचीत नहीं करेंगे। कृषि कार्य के लिए उनके खेतों में ट्रैक्टर नहीं भेजे जाएंगे।

गांव के दुकानदार उन्हें सामान नहीं बेचेंगे। सामाजिक गतिविधियों में भी उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। यह निर्णय गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप

सरपंच डोमेश्वरी यादव का कहना है कि बहिष्कार के बाद गांव में उनके खिलाफ माहौल बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को उनके परिवार से भी दूरी बनाने के लिए कहा जा रहा है।

सरपंच के मुताबिक, उनके खिलाफ पहले भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की गई थी। 13 जून को अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह पारित नहीं हो सका।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने गांव के मंदिर में बैठक कर शपथ ली कि जो भी सरपंच के पक्ष में मतदान करेगा, उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

वोट देने वालों पर भी दबाव के आरोप

रिपोर्ट के अनुसार आरोप है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कुछ पंचों पर दबाव बनाया गया। यह भी दावा किया गया कि सरपंच के समर्थन में वोट देने वालों को बहिष्कार की चेतावनी दी गई।

सरपंच पक्ष का कहना है कि कुछ लोगों ने 10 पंचों को प्रभावित करने के लिए आर्थिक प्रलोभन देने की भी कोशिश की। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों दोनों पक्षों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। जिला पंचायत और पुलिस प्रशासन को शिकायत सौंप दी गई है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस विवाद की जांच कर क्या कार्रवाई करता है और गांव में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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