भाटापारा,कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व को लेकर बाजार में हलचल तेज हो गई है। पूजन सामग्री की बिक्री बढ़ी है। पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा जैसी सामग्री की दुकानें सज गई हैं। लोग खरीदारी के लिए पहुंचने लगे हैं। 2 सितंबर को हलषष्ठी पर्व है। इसे लेकर बाजार में पसहर चावल और दूसरी पूजन सामग्री लेने महिलाओं की भीड़ बढ़ गई है।
संतानों की दीर्घायु की कामना से माताएं कमरछठ पर कठिन व्रत रखेंगी। उपवास तोड़कर खास अन्न पसहर चावल खाएंगी। यह चावल अब बाजार में आ गया है। शहर के अलग-अलग इलाकों की दुकानों में उपलब्ध है। लोगों ने खरीदारी भी शुरू कर दी है। इसकी खास बात यह है कि यह बिना हल चलाए खेत के मेड़ों और खेतों में उगता है। इसलिए हलषष्ठी पर इसकी मांग ज्यादा रहती है। इस चावल से व्रत तोड़ने का सदियों पुराना रिवाज बताया जाता है।
पसहर 20 से 30 रुपए गिलास: हलषाठी पर माताएं पूजा के स्थान पर सगरी खोदेंगी। भगवान शंकर, गौरी, गणेश को पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्री अर्पित करेंगी। पूजा के बाद घर पर बिना हल के जुते अनाज पसहर चावल और छह प्रकार की भाजी पकाकर प्रसाद बांटेंगी। इसी से उपवास तोड़ेंगी। बाजार में पसहर चावल 20 से 30 रुपए गिलास बिक रहा है। इसमें अलग-अलग किस्में भी बताई जा रही हैं। मोटा और साफ चावल के भाव तय किए गए हैं। महिलाएं जरूरत के अनुसार खरीद रही हैं।
खमरछट का सामान बेचती हुई महिला। 2 सितंबर को शहर के अलग-अलग इलाकों में माताएं व्रत रखकर पूजा-अर्चना करेंगी। अलग-अलग स्थानों पर एकत्र होकर कथा सुनेंगी। पूजन सामग्री अर्पित करेंगी। शिव-पार्वती कथा सुनते हुए संतान की लंबी आयु की कामना करेंगी। कमरछठ पर्व को लेकर माताओं में उत्साह रहता है। शहरभर के चौराहों और मोहल्लों में सामूहिक रूप से कथाएं सुनी जाएंगी।
माना जाता है कि यह पर्व भगवान शिव के पूरे परिवार से जुड़ा है। कथाओं में मुख्य रूप से शिव और पार्वती की धार्मिक गाथाएं शामिल रहती हैं। पूजा के दौरान महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से गड्ढे खोदकर सगरी तालाब बनाती हैं। इसमें पेड़-पौधे लगाती हैं। अलग-अलग पूजन सामग्री चढ़ाती हैं। शिव-पार्वती को भोग के रूप में पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्री अर्पित की जाएगी











