24 साल बाद खुला बंद जबड़ा, सरकारी अस्पताल की 7 घंटे की जटिल सर्जरी ने बदली युवक की जिंदगी, आयुष्मान योजना बनी सहारा

बिलासपुर (कमलकांत पाटनवार) सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी चिकित्सीय उपलब्धि दर्ज करते हुए छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध सिम्स अस्पताल, बिलासपुर के डॉक्टरों ने 24 वर्षीय युवक के बचपन से बंद जबड़े को सफलतापूर्वक खोल दिया। करीब छह से सात घंटे चली जटिल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के बाद अब मरीज का मुंह खुलना शुरू हो गया है और वर्षों तक केवल तरल आहार पर निर्भर रहने वाला युवक सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

इस दुर्लभ ऑपरेशन की खास बात यह रही कि निजी अस्पतालों में जिस उपचार पर तीन लाख रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान था, वही उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया गया।

बचपन की चोट ने रोक दिया था जबड़े का विकास

मुंगेली जिले के अमली कापा निवासी 24 वर्षीय युवक बचपन में लगी गंभीर चोट के बाद बाइलेटरल टेम्पोरो-मैंडिबुलर जॉइंट (B/L TMJ) एंकिलोसिस नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हो गया था।

इस स्थिति में दोनों जबड़ों के जोड़ आपस में जकड़ जाते हैं, जिससे मुंह खुलना लगभग असंभव हो जाता है। लगातार बंद जबड़े के कारण उसके निचले जबड़े का विकास भी रुक गया। वह वर्षों तक सामान्य भोजन नहीं कर सका और केवल तरल पदार्थों पर निर्भर रहा। पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से वह कुपोषण और शारीरिक कमजोरी का शिकार भी हो गया।

मुंह पूरी तरह बंद, इसलिए पहले बनाई गई सांस की अलग राह

सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग में मरीज की विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने ऑपरेशन की योजना बनाई। सीबीसीटी स्कैन, रक्त परीक्षण और अन्य रेडियोलॉजिकल जांचों के आधार पर सर्जिकल रणनीति तैयार की गई।

चूंकि मरीज का मुंह पूरी तरह बंद था, इसलिए सामान्य तरीके से बेहोशी देना संभव नहीं था। ऐसे में विशेषज्ञों ने पहले ट्रेकियोस्टॉमी कर श्वास नली स्थापित की, ताकि ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से किया जा सके। डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक से मिली नई उम्मीद

4 जून 2026 को करीब सात घंटे चली जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रक्रिया के तहत अविकसित निचले जबड़े को धीरे-धीरे लंबा करने के लिए दोनों ओर विशेष डिस्ट्रैक्शन उपकरण लगाए गए।

आने वाले तीन से चार महीनों में इन उपकरणों की मदद से जबड़ा क्रमिक रूप से सामान्य आकार की ओर विकसित होगा। फिलहाल नियमित फॉलोअप में मरीज के मुंह का खुलना शुरू हो चुका है और उसकी स्थिति लगातार बेहतर हो रही है।

बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम ने किया दुर्लभ ऑपरेशन

यह जटिल शल्य चिकित्सा दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश के नेतृत्व में संपन्न हुई।टीम में डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी किनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे और डॉ. सोनल पटेल शामिल रहे।

निश्चेतना विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति और उनकी टीम ने ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि रेडियोडायग्नोसिस विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने जांच एवं उपचार योजना में सहयोग दिया।

‘दांतों की बीमारी नहीं, जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा मामला’ सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि दंत एवं मुख संबंधी रोग केवल दांतों तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनका सीधा असर व्यक्ति के पोषण, बोलने की क्षमता, चेहरे के विकास और संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ चिकित्सकों और बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वय से सिम्स में अब ऐसे जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है और संस्थान भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण तथा निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, चिकित्सक सह अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि बचपन से जबड़ा बंद रहने जैसी दुर्लभ समस्याओं का समय रहते विशेषज्ञों से उपचार कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने लोगों से दांत और मुख संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करने तथा शुरुआती अवस्था में ही विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की।

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