25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में गया; चीनी 40% महंगी
मक्के का आटा 11% और चावल 16% तक महंगा
भारत,देश में चीनी के दाम 3 माह में 40% (19 रु./किग्रा) बढ़ गए। गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ। जबकि पिछले कुछ वर्षों से इनके दामों में खास बढ़ोतरी नहीं हुई थी। चीनी की कीमतें काबू करने के लिए सरकार ने गुरुवार को टैरिफ रेट कोटा के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी। साथ ही, हर माह 10 टन से अधिक खपत वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लगा दी। ये 15 दिन तक की खपत जितनी चीनी ही रख सकेंगे।
कीमतें बढ़ने की बड़ी वजह 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे 2026-27 सीजन में चौनी का ओपनिंग स्टॉक घरेलू खपत के लिए जरूरी 50 लाख टन से कम रहने का अनुमान है। मानकों के अनुसार एथेनॉल में 67% मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज प्रयोग होता है। बाकी 33% गन्ना और इसके उत्पाद प्रयोग होते हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार देश में पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा लगा। इसमें 34 लाख टन गन्ना था। खराब अनाज से पशु आहार और पॉल्ट्री फीड बनती थी। उपलब्धता घटने से पशु आहार 8-10% तक महंगा हुआ, जिससे दूध-अंडे की कीमतें भी 5-10% तक बढ़ चुकी हैं।
पूरी रसोई पर ही असर… तीन माह में चीनी के दाम 19 तो गुड़ के 15 रुपए तक बढ़ चुके हैं इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईएसएमए) के अनुसार, 2026-27 में गन्ने के कुल उत्पादन का अनुमान 46.3 करोड़ टन है। साथ ही, 3.36 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 12% ज्यादा है।
2025-26 में पेराई से पहले मिलों का ओपनिंग स्टॉक 47 लाख टन था। वहीं, 2026-27 के पेराई सीजन से पहले ये स्टॉक 32 लाख टन बचा है। बड़ी वजह ये है कि 2025-26 में 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल बनाने में लगा।
आईएसएमए के महानिदेशक दीपक बलानी कहते
हैं कि चीनी की कमी नहीं है। यह तेजी सट्टेबाजी और पैनिक बाइंग का नतीजा है। सीजन खत्म होने तक क्लोजिंग स्टॉक 35-40 लाख टन रहेगा। हालांकि, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा, ‘हम 3 साल से कह रहे हैं कि गन्ने का एथेनॉल में उपयोग मुश्किलें खड़ी करेगा। अब वही समय आ गया है। सरकार चीनी आयात कर रही है। लेकिन नवंबर से पहले दुनियाभर से ऐसी चीनी मिलने की संभावना बहुत कम है। सरकार रॉ शुगर के आयात के प्रयास में है। ऐसी चीनी का निर्यात करने वाले देश बहुत कम हैं।
करोड़ टन था, अब जीरो हुआ निर्यात… 4 साल पहले 1.33
581246 वाणिज्यिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार 2022-23 में 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ। 2023-24 में 51.35 लाख टन निर्यात की गई। 2024-25 में निर्यात घटकर 38.43 लाख टन तक सीमित हो गया। वर्ष 2026-27 में चीनी के निर्यात का आंकड़ा जीरो रहेगा,
क्योंकि इस बार आयात करने की नौबत आ गई है।














