ड्रिप सिंचाई से आसान हुई कृषक ‘सोनकुँवर’ की खेती

  • कम पानी में बेहतर उत्पादन, घटा श्रम और लागत, बढ़ी आमदनी

प्रद्युम्न सिंह कोरिया (बैकुंठपुर)। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन एवं वाटरशेड आर्गेनाइजेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित फोकस्ड डेवलपमेंट कार्यक्रम के अंतर्गत विकासखंड सोनहत के ग्रामीण महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाते हुए आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। ग्राम मझारटोला की श्रीमती सोनकुँवर ने ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाकर खेती को आसान और लाभकारी बनाया है।

 

वाटरशेड ऑर्सेगनाइजेशन ट्रस्ट के परियोजना कार्यक्रम से जुड़, सोनकुँवर पहले साग-सब्जी की खेती करती थीं, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से पानी की कमी, अधिक मेहनत और अतिरिक्त लागत की समस्या रहती थी। फोकस्ड डेवलपमेंट परियोजना के अंतर्गत कृषि एवं उद्यानिकी विकास योजनाओं के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली मिलने के बाद उनकी यह समस्या काफी हद तक दूर हुई है। ड्रिप सिस्टम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है। इससे पानी का बेहतर उपयोग होने के साथ सिंचाई में लगने वाला श्रम और लागत कम हुई है। अब सोनकुँवर अकेले ही अपने खेत की देखभाल कर लेती हैं। व्यवस्थित सिंचाई से साग-सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है, जिसका असर उनकी आमदनी पर पड़ा है।

 

सोनकुँवर कहती हैं, “पहिले जब ड्रिप नई लगे रहीस, त पानी के भारी कमी होत रहीस। अब जब से ड्रिप मशीन लगिस हे, हमला सब सुविधा हो गिस हे। खेती-बारी अच्छा से हो जथे, जादा बूता भी नई लागे अउ अकेले ही पूरा खेत संभल जथे। हमर ग्राम विकास समिति उ वाटर संस्था ल बहुत-बहुत धन्यवाद।” वे कहती है कि आधुनिक कृषि तकनीक और शासकीय योजनाओं का प्रभावी लाभ मिलने से ग्रामीण महिलाओं के लिए खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बन सकती है। ड्रिप सिंचाई ने उनके खेत में पानी के बेहतर प्रबंधन के साथ खेती को आसान, व्यवस्थित और अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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